विदेशी धन के प्रवाह की खामियों से निपटने के लिए तंत्र मौजूद : मुखर्जी
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के एक कार्यक्रम में विदेशी संस्थागत निवेशकों से भारी मात्र में देश में धन आने के बारे में पूछे गए एक सवाल पर मुखर्जी ने कहा, "यह चिंता का मामला नहीं है। विदेशी धन के प्रवाह की निगरानी के लिए हमारे पास एक तंत्र मौजूद है।"
वित्त मंत्री ने कहा, "जब भी हम इसमें कुछ खराबी पाते हैं, उसे दूर करने के प्रबंध किए जाते हैं।"
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष देश के शेयर बाजार में विदेशी कोष का प्रवाह 15.142 अरब डॉलर था।
इस वर्ष विदेशी धन के अधिक आगमन से भारतीय रुपये में मजबूती आई है जो निर्यातकों और नीति निर्माताओं के लिए परेशानी का कारण है।
एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री (एसोचैम) ने विदेशी फंडों पर कर लगाने और नियमों में सुधार का प्रस्ताव किया है। बड़े पैमाने पर विदेशी फंडों का आना भारतीय रिजर्व बैंक सहित नीति निर्माताओं के लिए चिंता का कारण है।
एसोचैम ने कहा कि ब्राजील की तरह विदेशी संस्थागत निवेशकों पर दो प्रतिशत का कर लगाया जाना चाहिए, जिससे मुद्रा बाजार में संतुलन कायम रखा जा सके और भारत में वर्ष 2007 की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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