दलाई लामा से भेंट नहीं करेंगे न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री (लीड-1)
समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार के ने संवाददाताओं को बताया, "इसकी वजह सिर्फ इतनी है कि मुझे लगता है कि इस मुलाकात से मुझे कुछ खास हासिल नहीं होगा। मैं अपने यहां आने वाले हरेक धार्मिक नेता से मुलाकात नहीं करता। मैंने अतीत में उनसे भेंट की है और मैं भविष्य में भी उनसे मुलाकात कर सकता हूं।" पिछले साल प्रधानमंत्री पद पर आसीन होने से पहले के ने कहा था कि वह दलाई लामा की भविष्य में होने वाली यात्राओं के दौरान उनसे भेंट करेंगे।
के ने इस बात से इंकार किया कि चीन ने उन पर दलाई लामा की यात्रा का बहिष्कार करने का दबाव डाला है। उन्होंने कहा कि पिछले सप्ताह सिंगापुर में क्षेत्रीय शिखर सम्मेलन के दौरान चीन के राष्ट्रपति हू जिन्ताओ और अन्य किसी चीनी एजेंसी ने उन्हें दलाई लामा से भेंट करने से नहीं रोका।
लेकिन दलाई लामा की यात्रा का आयोजन करने वाले न्यास के प्रवक्ता का कहना है कि प्रधानमंत्री के इस फैसले की सिर्फ एक ही वजह हो सकती है। और वह है न्यूजीलैंड में चीन का प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से बढ़ता राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव।
उन्होंने कहा कि तिब्बत में चीन द्वारा मानवाधिकारों का उल्लंघन न्यूजीलैंड की सरकारों के लिए अब चिंता का विषय नहीं रह गया है। कैमरून ने कहा कि प्रधानमंत्री का फैसला निराशाजनक है, लेकिन अचरजभरा नहीं है।
उन्होंने कहा, "हम ऐसे दौर में प्रवेश कर चुके हैं जब चीन दुनिया के बहुत से देशों की अर्थव्यवस्थाओं और आंतरिक नीतियों पर असर डाल रहा है और न्यूजीलैंड भी इसका अपवाद नहीं है।"
उन्होंने कहा कि हो सकता है कि प्रधानमंत्री पर चीन के अधिकारियों और एजेंसियों ने प्रभाव डाला हो या फिर हो सकता है कि न भी डाला हो, लेकिन उनके निमंत्रण मंजूर कर लेने पर संभवत: ऐसा ही किया जाता।
कैमरून ने बताया कि ऑकलैंड के अखबारों ने इस यात्रा के बारे में संपादकीय और विज्ञापन छापने से इंकार कर दिया है। उन्होंने बताया कि विपक्षी नेता फिल गॉफ ने दलाई लामा से भेंट करने का निमंत्रण स्वीकार कर लिया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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