आंध्राः एक दिन में छह शिशुओं की मौत

जहाँ अधिकारयों का कहना था की शिशुओं को अनेक गंभीर रोग थे जिनके कारण उनकी मृत्यु हुई वहीं दुखी परिवारों का आरोप है कि अस्पताल के डाक्टरों और कर्मचारियों की लापरवाही और वेंटिलेटर सहित अनेक उपकरणों के काम न करने के कारण इन नवजात शिशुओं की जान गई.
ये सारे बच्चे गरीब परिवारों के थे. यह दुखद घटना ऐसे समय पर घटी है जब राज्य भर में सरकारी अस्पतालों में जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर हैं और वेतन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं.
शोक और ग़ुस्सा
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री सुदर्शन रेड्डी ने इस मामले की जाँच के लिए एक समिति बिठाई है. उन्होंने ये माना कि अस्पताल में एक ही वेंटिलेटर होने के कारण सभी शिशुओं को ये सुविधा उपलब्ध नहीं करवाई जा सकी. आंध्र प्रदेश के मानव अधिकार आयोग ने भी इस घटना पर राज्य सरकार को एक नोटिस जारी किया है.
आयोग ने मुख्य सचिव रमाकांत रेड्डी और कृष्णा ज़िले के मेडिकल और स्वास्थ्य अधिकारी को आदेश दिया है की वो इस घटना का पूरा ब्यौरा तुरंत आयोग को पेश करें और बताएं कि इस के ज़िम्मेदार अधिकारयों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जा रही है. इसके लिए आयोग ने मंगलवार तक का समय दिया है.
एक साथ छह नवजात शिशुओं की मृत्यु की घटना ने विजयवाडा नगर में शोक और क्रोध की लहर दौड़ा दी और सोमवार को दिन भर अस्पताल में विरोध प्रदर्शन होते रहे. सरकार की ओर से तो अब तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं व्यक्त की गई है लेकिन विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया और दुखी परिवारों के लिए मुआवज़े की मांग की है.
गंभीर रोग
अस्पताल के कार्यवाहक सुपरिंटेंडेंट एस बी लाल ने माना कि एक दिन में इस तरह की एक दो मौतें हो सकती हैं लेकिन छह मौतें एक असाधारण घटना हैं. साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि इन नवजात शिशुओं को गंभीर रोग थे. डॉ लाल के अनुसार एक शिशु को दिमागी रोग था, एक पैदाइशी रूप से ही कमज़ोर था, एक को हृदय रोग, एक को दम्मा था और एक बच्चा ऑक्सीजन ना मिलने से मरा.
तीन वर्ष पहले हैदराबाद के मशहूर नीलोफ़र हॉस्पिटल में भी एक ही दिन में सात नवजात शिशुओं की मौत के बाद एक हंगामा खडा हो गया था और डॉक्टरों पर हमले के बाद कर्मचारियों ने हड़ताल कर दी थी.












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