विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं को हाईटेक बनाना होगा : मीणा
मीणा मंगलवार शाम यहां राजस्थान पुलिस अकादमी सभागार में चल रहे तीन दिवसीय 20वीं अखिल भारतीय फोरेंसिक साइंस कांफ्रेंस-2009 के समापन समारोह में मुख्य अतिथि पद से बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि आज बढ़ती तकनीक के साथ-साथ अपराध की प्रकृति में भी बदलाव आया है। अत: विधि विज्ञान से जुड़े वैज्ञानिकों को भी अद्यतन तकनीक का सहारा लेकर अपने अनुसंधान करने होंगे। उन्होंने बताया कि केन्द्र सरकार द्वारा विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं के विकास के लिए 300 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि बदलते अपराध परिदृश्य को ध्यान में रखकर हमें पुलिस अधिकारियों को प्रशिक्षित करना होगा। वहीं अपराध के साक्ष्य जुटाने के कार्य भी तत्परता से करने होंगे।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री, ए.ए.ख़ान ने इस बात पर बल दिया कि विधि विज्ञान के कार्य में तेजी लाने के लिए आधुनिक शोध और विकास प्रक्रिया को साथ-साथ बढ़ावा देना होगा। उन्होंने कहा कि देश के सभी चिकित्सा संस्थानों में विधि विज्ञान के अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए अधिक सुविधाएं उपलब्ध करानी होगी।
ख़ान ने प्रदेश में विधि विज्ञान के क्षेत्र में किए गए कार्य का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान में जोधपुर, कोटा और उदयपुर में प्रयोगशालायें कार्यरत हैं और जल्दी ही बीकानेर में भी प्रारम्भ की जानी प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि अपराध अनुसंधान की दिशा में विधि विज्ञान पुख्ता सहायक है। अत: विधि विज्ञान वैज्ञानिकों की भूमिका को पुलिस से जुदा करके नहीं देखा जा सकता है।
चिकित्सा मंत्री ने बताया कि आधुनिक तकनीक के बढ़ने से विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं के कार्यक्षेत्र में काफी इजाफा हुआ है। इस दृष्टि से वैज्ञानिकों को अद्यतन तकनीक से वाकिफ रहना जरूरी है।
समारोह में मीणा और ख़ान ने विधि विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय सेवाओं के लिए वैज्ञानिकों को पदक, पुरस्कार और प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया। समारोह में विधि विज्ञान निदेशालय, दिल्ली की निदेशक डॉ. श्रीमती विभा रानी रे ने कांफ्रेंस की रिपोर्ट पढ़ी।
प्रारम्भ में होमगार्डस् एवं नागरिक सुरक्षा के महानिदेशक, के.एस.बैन्स ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि इस सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों एवं विदेश से आये लगभग 300 प्रतिनिधियों ने भाग लिया जिनमें पुलिस, न्यायिक सेवा, वैज्ञानिक तथा विधि विज्ञान का कार्य कर रहे वैज्ञानिक शामिल हैं। अन्त में राज्य विधि-विज्ञान प्रयोगशाला के निदेशक, वी.एन. माथुर ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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