एयरहोस्टेस के साथ यौन उत्पीड़न नहीं हुआ था : महिला आयोग (लीड-1)
आयोग ने सोमवार को केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल और केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री कृष्णा तीरथ को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। आयोग की सदस्य वेन्सुक स्येम के नेतृत्व वाली जांच समिति ने इस मामले की छानबीन की थी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि उड़ान के दौरान चालक और सह चालक का फ्लाइट पर्सर और एयर होस्टेस के साथ झगड़ा अवश्य हुआ था, लेकिन महिला का यौन उत्पीड़न हरगिज नहीं हुआ था।
आयोग की रिपोर्ट के अनुसार पायलट रणबीर अरोड़ा ने फ्लाइट पर्सर अमित खन्ना को काकपिट में बुलाया। खन्ना के पीछे एयर होस्टेस कोमल सिंह भी काकपिट में गईं और वहां अरोड़ा और सह पायलट आदित्य चोपड़ा ने गैरपेशेवर व्यवहार के लिए पर्सर को चेतावनी दी, क्योंकि उसने उड़ान के दौरान घोषणाओं की प्रक्रिया का पालन नहीं किया था। इस पर पर्सर ने बेतुका जवाब दिया और इसके कारण दोनों पायलट आपा खो बैठे।
रिपोर्ट में कहा गया है, "बहस के दौरान पायलटों ने फ्लाइट पर्सर और एयर होस्टेस कोमल सिंह को उड़ान और नागरिकों की सुरक्षा के लिए कॉकपिट से बाहर धकेल दिया था जिसकी वजह से एयर होस्टेस को बाजू में खरोंचे आई थीं।"
समिति ने हालांकि कहा है, "कमांडर को भी वैसा सलूक करने की कोई जरूरत नहीं थी।"
यह घटना शारजाह-लखनऊ-दिल्ली आईसी-884 उड़ान के दौरान तीन अक्टूबर को हुई थी। एयर होस्टेस कोमल सिंह ने घटना के एक दिन बाद गत तीन अक्टूबर को सह-चालक पर दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया था। दिल्ली पुलिस द्वारा चालकों के खिलाफ छेड़छाड़ का मामला दर्ज किए जाने के बाद एयरलाइंस ने उन्हें ड्यूटी से हटा दिया था।
एयर इंडिया की समिति ने भी इस मामले जांच की थी और और दुर्व्यवहार के आरोपों को निराधार बताया था। नियमों का उल्लंघन करने के लिए एयर होस्टेस के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया था।
स्येम ने आईएएनएस को बताया, समिति ने आरोप पत्र वापस लेने की सिफारिश की है। एयर होस्टेस द्वारा आयोग के खिलाफ अदालत में हलफनामा दाखिल किए जाने पर उन्होंने कहा कि यदि एयर होस्टेस को आयोग पर भरोसा नहीं था तो उन्हें यह शिकायत उसके पास दर्ज नहीं करानी चाहिए थी। अपने मददगारों के खिलाफ हलफनामे से उन्हीं का मामला और बिगड़ेगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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