गैस विवाद में पेट्रोलियम मंत्रालय को पक्ष बनाने का विरोध (लीड-1)
आरएनआरएल ने कहा है कि यदि मंत्रालय की याचिका मंजूर की जाती है तो अधिकारियों से जिरह करने की अनुमति हर हाल में दी जानी चाहिए।
आरएनआरएल के वकील राम जेठमलानी ने तीन न्यायाधीशों वाली खंडपीठ के समक्ष याचिका पर बहस करते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका के औचित्य पर भी सवाल उठाया और कहा कि यह नियमों के खिलाफ है।
जेठमलानी ने अपनी यह बात उस समय कही, जब अतिरिक्त महान्यायाधिवक्ता मोहन पारासरन पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से प्रधान न्यायाधीश के.जी.बालाकृष्णन, न्यायमूर्ति बी.सुदर्शन रेड्डी और न्यायमूर्ति पी.सथशिवम की खंडपीठ के समक्ष याचिका दायर कर रहे थे।
जेठमलानी ने कहा, "यदि मंत्रालय एक मध्यस्थ के रूप में अदालत को सहयोग करना चाहता है तो हमें इसमें कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन यदि वह एक पक्ष बनना चाहता है और कुछ दस्तावेज यहां प्रस्तुत करना चाहता है तो हमें इससे सख्त आपत्ति है।"
जेठमलानी ने कहा, "मैं पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकार को एक मध्यस्थ के रूप में स्वीकार कर सकता हूं लेकिन यदि वह कोई दस्तावेज दायर करता है तो मैं उस पर उससे जिरह करने के अपने अधिकार का इस्तेमाल करूंगा।"
इस पर पारासरन ने सर्वोच्च न्यायालय से कहा कि पेट्रोलियम मंत्रालय को याचिका दायर करने का पूरा अधिकार है।
इसके पहले मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) के वकील रोहिंगटन नरीमन ने खंडपीठ के समक्ष अपनी बहस समाप्त की और उन्होंने कहा कि कंपनी के प्रमोटरों के बीच हुए निजी पारिवारिक समझौते को उसके शेयरधारकों पर नहीं थोपा जा सकता।
नरीमन ने कहा, "न्यायालय को एक गेंदबाज या क्षेत्ररक्षक के बजाय अंपायर की तरह काम करना है।"
नरीमन ने आगे कहा, "न्यायालय के पास केवल पर्यवेक्षक की भूमिका है।"
अनिल अंबानी समूह के रवैये पर सवाल उठाते हुए आरआईएल के वकील ने यह भी कहा कि आरएनआरएल पारिवारिक समझौते के आधार पर कारपोरेट मामलों में न्यायिक राहत नहीं मांग सकती।
पारिवारिक समझौते के अनुसार अनिल अंबानी समूह 17 वर्षो तक 2.34 डॉलर प्रति यूनिट की दर से प्रतिदिन 2.8 करोड़ यूनिट गैस की आपूर्ति चाहता है। परंतु मुकेश अंबानी समूह का कहना है कि वह केवल सरकार द्वारा तय 4.20 डॉलर प्रति यूनिट की दर से गैस आपूर्ति कर सकता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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