भारतीय छात्रों को अमेरिका तो अमेरिकी छात्रों को भाता है भारत (लीड-1)
सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार शिक्षा सत्र 2008-09 में भारत से 103,000 विद्यार्थी पढ़ाई के लिए अमेरिका गए। यह संख्या अमेरिका में शिक्षा ग्रहण करने हेतु किसी भी अन्य देश से आने वाले विद्यार्थियों की संख्या से अधिक है। दूसरी ओर अमेरिकी विद्यार्थियों के लिए भारत भी अध्ययन के लिए पसंदीदा जगह बना हुआ है।
इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशन एजुकेशन की ओर से सोमवार को जारी 'ओपन डोर 2009' सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत इस मामले में पिछले आठ सालों से लगातार सबसे आगे बना हुआ है। वर्ष 2008-09 में अमेरिका जाने वाले भारतीय विद्यार्थियों की संख्या में नौ फीसदी वृद्धि हुई है।
भारतीय छात्रों के बाद दूसरा नंबर चीन से आने वाले छात्रों का है। यहां चीन से 98,510 छात्र आते हैं। इनकी संख्या में 21 प्रतिशत वृद्धि हुई है। तीसरे स्थान पर दक्षिण कोरिया से आने वाले छात्र हैं। दक्षिण कोरिया से 75,065 छात्र आते हैं, जिनकी संख्या में नौ फीसदी की वृद्धि हुई है। कनाडा शीर्ष पांच देशों की सूची में एक मात्र ऐसा गैर एशियाई देश है, जो विद्यार्थियों की संख्या में दो प्रतिशत की वृद्धि के साथ चौथे स्थान पर आ गया है। यहां से अमेरिका आने वाले विद्यार्थियों की संख्या 29,697 है। यहीं पर लगातार चौथे साल विद्यार्थियों की घटती संख्या के कारण जापान पांचवें स्थान पर पहुंच गया है।
सर्वे रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका में शिक्षा सत्र 2008-09 में 671,616 अंतर्राष्ट्रीय छात्र आए। यह संख्या पिछले साल के मुकाबले आठ फीसदी अधिक हैं।
सर्वे में कहा गया है कि बड़ी संख्या में अमेरिकी विद्यार्थी भी भारत, चीन, जापान, दक्षिण अफ्रीका और अर्जेटीना में अध्ययन करने आते हैं। ये स्थल अमेरिकी विद्यार्थियों के लिए पसंदीदा बन कर उभरे हैं।
शिक्षा सत्र 2007-08 में दूसरे देशों में अध्ययन करने वाले अमेरिकी विद्यार्थियों की संख्या में 8.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस तरह यह संख्या 262,416 बैठती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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