कोलकाता मेट्रो ने खामोशी से रजत जयंती मनाई
कोलकाता, 17 नवंबर (आईएएनएस)। जहां एक ओर दिल्ली मेट्रो का तेजी से विस्तार हो रहा है वहीं दूसरी ओर देश की पहली भूमिगत मेट्रो रेल सेवा ने बिना किसी शोर-शराबे के खामोशी से अपने 25 वर्ष पूरे कर लिए हैं।
यातायात की अव्यवस्था, टूटी-फूटी, गड्ढ़ों युक्त गलियों और गंदगी के लिए बदनाम शहर कोलकाता में समय की पाबंद और तेज गति वाली मेट्रो रेल ने अपनी अच्छी यात्रा और स्वच्छता के लिए यात्रियों की प्रशंसा पाई है।
24 अक्टूबर 1984 को शुरू हुई मेट्रो हर दिन करीब पांच लाख यात्रियों को शहर के दक्षिणी इलाके गरिया बाजार से उत्तरी छोर दम दम तक ले जाती है।
भारतीय रेल इंडिया टेकि्न ल एंड इकोनोमिक सर्विसिज (आरआईटीईएस) के सेवानिवृत्त प्रबंध निदेशक एवं अध्यक्ष एम. सेषगिरी राव कहते हैं, "यहां कभी भी रेलगाड़ी के पटरी से उतरने, लोगों की मृत्यु के हादसे होने या ढांचे के ढहने जैसी घटनाएं नहीं हुई हैं।"
किसी विदेशी सलाहकार या विदेशी ठेकेदार की मदद के बिना भारतीय रेलवे के इंजीनियरों ने इसका निर्माण किया था। मेट्रो मार्ग का ज्यादातर हिस्सा समुद्र तल से नीचे है।
कोलकाता मेट्रो की शुरुआत 3.4 किलोमीटर के क्षेत्र में फैले पांच स्टेशनों से हुई थी। अब मेट्रो के 21 स्टेशन हैं जो 22.28 किलोमीटर के क्षेत्र में फैले हैं। इस साल एक और स्टेशन शामिल करने की योजना है।
कोलकाता मेट्रो रेल के महाप्रबंधक वी. एन. त्रिपाठी ने आईएएनएस से कहा, "इसकी सफलता का मुख्य मंत्र इसका सस्ता किराया (प्रत्येक बार यात्रा करने पर 4 रुपये से 12 रुपये तक) है। हर दिन करीब 500,000 यात्री इससे यात्रा करते हैं। हमारी सेवा कैसी है यह यात्रियों की लगातार बढ़ती संख्या से परिलक्षित होता है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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