न्यायालय पारिवारिक समझौता शेयरधारकों पर नहीं थोप सकता : आरआईएल
नई दिल्ली, 17 नवंबर (आईएएनएस)। मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) ने मंगलवार को सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष कहा कि कंपनी के प्रमोटरों के बीच हुए निजी पारिवारिक समझौते को उसके शेयरधारकों पर नहीं थोपा जा सकता।
कृष्णा-गोदावरी बेसिन के गैस विवाद की सुनवाई कर रही सर्वोच्च न्यायालय की खंडपीठ के समक्ष आरआईएल के वकील रोहिंग्टन नरीमन ने कहा, "न्यायालय को एक गेंदबाज या क्षेत्ररक्षक के बजाय अंपायर की तरह काम करना है।"
रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेस लिमिटेड (आरएनआएल) और आरआईएल के बीच विवाद की सुनवाई कर रही प्रधान न्यायाधीश के.जी.बालाकृष्णन, न्यायामूर्ति बी.सुदर्शन रेड्डी और न्यायाधीश पी.सथशिवम की खंडपीठ के सामने नरीमन ने कहा, "न्यायालय के पास केवल पर्यवेक्षक की भूमिका है।"
अनिल अंबानी समूह के रवैये पर सवाल उठाते हुए आरआईएल के वकील ने यह भी कहा कि आरएनआरएल पारिवारिक समझौते के आधार पर कारपोरेट मामलों में न्यायिक राहत नहीं मांग सकती।
पारिवारिक समझौते के अनुसार अनिल अंबानी समूह 17 वर्षो तक 2.34 डॉलर प्रति यूनिट की दर से प्रतिदिन 2.8 करोड़ यूनिट गैस की आपूर्ति चाहता है। परंतु मुकेश अंबानी समूह का कहना है कि वह केवल सरकार द्वारा तय 4.20 डॉलर प्रति यूनिट की दर से गैस आपूर्ति कर सकता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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