'दर्द मिटाना है तो प्रियजनों के बारे में सोचें'
'यूनीवर्सिटी ऑफ कैलीफोर्निया इन लास एंजेलिस' (यूसीएलए) के अध्ययनकर्ताओं के मुताबिक अध्ययन में सामाजिक संबंधों और समाजिक रूप से जुड़े रहने का महत्व बताया गया है।
अध्ययन में 25 महिलाओं को कुछ तस्वीरें दिखाई गईं और उनके हाथों में ऊष्मा की दर्दनाक उत्तेजनाएं दी गईं। विभिन्न तस्वीरों को दिखाते समय महिलाओं में दर्द का स्तर देखा गया। महिलाओं को उनके पुरुष मित्र, एक अजनबी और एक कुर्सी की तस्वीरें दिखाई गई थीं।
अध्ययन की सह-लेखिका और यूसीएलए के 'सोशल एंड एफेक्टिव न्यूरोसाइंस लेबोरेट्री' की निदेशक नाओमी इसेनबर्जर का कहना है, "किसी वस्तु या किसी अजनबी व्यक्ति की तस्वीर देखने की अपेक्षा जब महिलाओं ने अपने साथी की तस्वीर देखी तो उन्हें कम दर्द महसूस हुआ।"
उन्होंने कहा कि बार-बार प्रिय व्यक्ति की तस्वीर दिखाने से उन महिलाओं में दर्द कम करने में मदद मिली थी।
एक अन्य स्थिति में किए अध्ययन में महिलाओं से बारी-बारी से उनके पुरुष मित्र, अजनबी व्यक्ति का हाथ पकड़ने, हाथ में गेंद लेने के लिए कहा गया। महिलाओं के अजनबी का हाथ पकड़ने या हाथ में गेंद लेने की अपेक्षा अपने पुरुष मित्र का हाथ पकड़ने पर दर्द का एहसास कम हुआ।
ईसेनबर्जर ने कहा कि अध्ययन के परिणामों से स्पष्ट हुआ है कि किस तरह सामाजिक समर्थन लोगों को प्रभावित करता है और हमारे शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य में सामाजिक संबंधों का बहुत महत्व होता है।
शोधकर्ताओं की सलाह है कि तनाव की स्थिति या दर्द अनुभव होने पर प्रिय व्यक्ति पास न हों तो उनकी तस्वीरें देखें।
'सायकोलॉजिकल साइंस' पत्रिका के नवम्बर के अंक में इस अध्ययन के परिणाम प्रकाशित किए गए हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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