बिहार में कनिष्ठ चिकित्सकों की हड़ताल के दौरान 71 मरीजों की मौत

वैकल्पिक व्यवस्था के तहत अतिरिक्त चिकित्सकों की तैनाती के बावजूद इन अस्पतालों में जूनियर डॉक्टरों के हड़ताल पर चले जाने के कारण चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। हड़ताल की अवधि में पीएमसीएच में अब तक 71 मरीजों की मौत की खबर है। उधर पीएमसीएच प्रशासन अब तक 47 तथा डीएमसीएच प्रशासन 5 मरीजों की मौत को स्वीकार कर रहा है।

पीएमसीएच के जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के महासचिव डॉ़ धनंजय कुमार ने सोमवार को कहा कि जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल सातवें दिन में प्रवेश कर गई है। उन्होंने कहा कि राज्य स्वास्थ्य सेवा संघ ने भी हड़ताल को समर्थन देने की बात कही है।

डीएमसीएच के जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ़ प्रभात ने बताया कि अगर उनकी मांग शीघ्र नहीं मानी गईं तो अन्य मेडिकल कॉलेजों के जूनियर डॉक्टर भी हड़ताल पर चले जाएंगे।

पीएमसीएच के उपाधीक्षक डॉ़ आऱ क़े सिंह ने सोमवार को कहा कि वैकल्पिक व्यवस्था के तहत अब तक 116 चिकित्सकों ने योगदान दिया है तथा काम शुरू कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि पीएमसीएच के वाडरें में भर्ती मरीजों को बेहतर इलाज मुहैया कराई जा रही है।

राज्य मानवाधिकार आयोग ने हड़ताली चिकित्सकों को काम पर लौटने के बाद अपनी मांगों को सरकार के सामने रखने को कहा है। राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस एस़ एऩ झा ने बताया कि आयोग ने राज्य के स्वास्थ्य सचिव को भी इस मामले में तलब किया है।

उल्लेखनीय है कि पीएमसीएच के जूनियर डॉक्टर 13,000 रुपये के मानदेय को 25,000 से 30,000 तक करने की मांग को लेकर सोमवार से और डीएमसीएच के जूनियर डॉक्टर गुरुवार से बेमियादी हड़ताल पर हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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