जूनियर डॉक्टरों ने मांगों के समर्थन ने दिया धरना (लीड-2)
इधर, राज्य मानवाधिकार आयोग ने हड़ताली जूनियर डॉक्टरों के एक प्रतिनिधिमंडल को अपना पक्ष रखने के लिए मंगलवार को आयोग के कार्यालय में बुलाया है।
पीएमसीएच तथा डीएमसीएच में जूनियर डॉक्टरों ने अपनी मांगों के समर्थन में परिसर में ही धरना दिया। जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के महासचिव डा. धनंजय ने बताया कि वे लोग भी हड़ताल के पक्ष में नहीं हैं परंतु सरकार की हठधर्मिता के कारण हड़ताल आज भी जारी है। उन्होंने बताया कि यह धरना कार्यक्रम प्रतिदिन दोनों अस्पतालों में चलेगा। उन्होंने कहा कि राज्य स्वास्थ्य सेवा संघ ने भी हड़ताल को समर्थन देने की बात कही है।
इधर, राज्य मानवाधिकार आयोग ने हड़ताल के मामले पर आज सरकार का पक्ष सुना। आयोग ने मंगलवार को जूनियर डॉक्टरों के प्रतिनिधिमंडल को अपना पक्ष रखने के लिए कार्यालय में बुलाया है।
इन अस्पतालों में जूनियर डॉक्टरों के हड़ताल पर चले जाने के कारण चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। हालांकि वैकल्पिक व्यवस्था के तहत अतिरिक्त चिकित्सकों की तैनाती की गई है। इधर, हड़ताल के दरम्यान पीएमसीएच में अब तक 71 लोगों की मौत की खबर है। जबकि पीएमसीएच प्रशासन अब तक 47 तथा डीएमसीएच प्रशासन 5 मरीजों की मौत की बात कह रहा है।
इधर, डीएमसीएच के जूनियर डॉक्टर के संघ के अध्यक्ष डॉ़ प्रभात ने बताया कि अगर जल्द उनकी मांगे नहीं मानी गईं तो अन्य मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टर भी हड़ताल पर चले जाएंगे।
पीएमसीएच के उपाधीक्षक डॉ़ आर. क़े सिंह ने सोमवार को कहा कि वैकल्पिक व्यवस्था के तहत अब तक 116 चिकित्सकों ने काम शुरू कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि पीएमसीएच के वार्डो में भर्ती मरीजों को बेहतर इलाज मुहैया कराया जा रहा है।
इधर, राज्य मानवाधिकार आयोग ने हड़ताली चिकित्सकों को काम पर लौट आने के बाद अपनी मांगों को सरकार के सामने रखने की बात कही है। राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस एस़ एऩ झा ने बताया कि आयोग ने राज्य के स्वास्थ्य सचिव को भी इस मामले में तलब किया गया है।
उल्लेखनीय है कि पीएमसीएच के जूनियर डॉक्टरों अपने 13,000 रुपये के मानदेय को 25,000 से 30,000 तक करने की मांग को लेकर सोमवार से तथा डीएमसीएच के जूनियर डॉक्टर गुरुवार से बेमियादी हड़ताल पर हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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