तृणमूल सांसद ने अपनी ही पार्टी को कटघरे में खड़ा किया
कोलकाता प्रेस क्लब में रविवार शाम एक बांग्ला अखबार का लोकार्पण करते हुए सुमन ने कहा, "विकास कार्यो के लिए आवंटित कोष के दुरुपयोग के मामले में सत्ताधारी माकपा और विपक्षी दलों के बीच मुझे कोई फर्क नहीं दिखता। हर कोई यहां निजी राजनीतिक फायदे की सोचता है।"
खुद को पार्टी का 'दास' करार देते हुए सुमन ने कहा, "मुझे सांसद कहकर मत पुकारिए। मैं राजनीतिज्ञ नहीं हूं। जन आंदोलन के आह्वान को देखते हुए मैं राजनीति में आया था।"
उन्होंने कहा, "यदि मेरी लोकसभा सदस्यता रद्द कर दी जाए तो मुझे बहुत खुशी होगी। यदि मुझे अगला लोकसभा चुनाव न लड़ना पड़े तो मुझे और भी खुशी होगी।"
उन्होंने कहा, "लोगों को सवाल उठाते रहना चाहिए कि आखिरकार विकास क्यों नहीं हो रहा है। मेरा अपना अनुभव रहा है कि दक्षिणी 24 परगना में विकास का कोई काम नहीं हुआ है। इससे पहले पंचायत चलाने वालों ने विकास नहीं किया और जो आज सत्ता में हैं उन्होंने भी तो कुछ नहीं किया।"
ज्ञात हो कि दक्षिणी 24 परगना की पंचायत में तृणमूल कांग्रेस सत्ता में है। इससे पहले वाम मोर्चा सत्ता में था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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