मुल्लपेरियार पर केरल के कानून का पालन क्यों कर रहा है तमिलनाडु : जयललिता
चेन्नई, 15 नवंबर (आईएएनएस)। मुल्लपेरियार बांध पर वाकयुद्ध जारी रखते हुए आल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) की प्रमुख जे.जयललिता ने तमिलनाडु सरकार पर आरोप लगाया कि राज्य सरकार मुल्लपेरियार बांध के मुद्दे पर केरल सरकार की नीति का पालन कर रही है।
जयललिता ने आरोप लगाया है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद तमिलनाडु सरकार ने बांध के जलस्तर को 142 फुट की ऊंचाई तक ले जाने के लिए बांध के दरवाजों को बंद नहीं किया।
जयललिता ने रविवार को यहां जारी एक बयान में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा वर्ष 2006 में दिए गए आदेश का जिक्र करते हुए कहा है, "एक नहीं बल्कि तीन मानसून बीत चुके हैं, लेकिन तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.करुणानिधि ने जल स्तर को 142 फुट की ऊंचाई तक ले जाने के लिए बांध के दरवाजे बंद करने के लिए अपने अधिकारियों को निर्देश नहीं दिए हैं। इसमें गलती किसकी है? करुणानिधि की? केरल सरकार की? या सर्वोच्च न्यायालय की?"
वर्ष 1886 में ट्रावनकोर के तत्कालीन महाराजा और ब्रिटिश प्रशासन के बीच हुए एक समझौते के तहत निर्मित हुए मुल्लपेरियार बांध को लेकर केरल और तमिलनाडु के बीच लगातार विवाद रहा है।
जयललिता ने कहा है, "मेरे मुख्यमंत्रित्व काल में 27 फरवरी 2006 को सर्वोच्च न्यायालय ने मुल्लपेरियार मामले में आदेश जारी करते समय तमिलनाडु सरकार के तर्क को स्वीकार किया था। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि बांध के जल स्तर को वर्तमान 136 फुट से 142 फुट तक बढ़ाया जा सकता है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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