'लिट्टे ने उल्फा को हथियार ही नहीं दिए, उन्हें प्रशिक्षित भी किया'

नई दिल्ली, 15 नवंबर (आईएएनएस)। पिछले महीने इस बात का खुलासा हुआ था कि श्रीलंका के विद्रोही संगठन लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) ने युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) को हथियार मुहैया कराए थे। अब उल्फा के एक पूर्व नेता ने कहा है कि लिट्टे ने उल्फा को न सिर्फ हथियार मुहैया कराए थे, बल्कि उन्हें प्रशिक्षित भी किया था।

उल्फा के पूर्व प्रवक्ता सुनील नाथ ने कहा है कि उल्फा का एक दल 1990 के दशक के प्रारंभ में श्रीलंका में जाफना गया था। उन दिनों उत्तरी प्रायद्वीप पर लिट्टे का नियंत्रण था।

सुनील नाथ ने असम से आईएएनएस को फोन पर बताया, "तमिलनाडु के एक नेता के माध्यम से लिट्टे से हमारा संपर्क हुआ था।"

उल्फा से अलग होकर पत्रकारिता के पेशे से जुड़े सुनील नाथ के अनुसार उल्फा के दो लड़ाके लिट्टे से प्रशिक्षण लेने के लिए कुछ दिनों के लिए उनके पास गए थे। लेकिन वे एक सप्ताह के भीतर ही भारत लौट आए थे।

इन दिनों व्यापारी बन चुके उल्फा के एक अन्य पूर्व सदस्य के अनुसार, उल्फा के लोग समय से पहले इसलिए वापस लौट आए थे, क्योंकि लिट्टे का प्रशिक्षण हमारे लिए बहुत सख्त था।

सुनील नाथ ने कहा कि उल्फा का प्रतिनिधिमंडल उन दिनों लिट्टे में दूसरे दर्जे के नेता रहे महत्ताया से भी मिला था। बाद में 1994 में लिट्टे ने भारत के लिए खुफियागिरी करने के आरोप में महत्ताया की हत्या कर दी थी।

सुनील नाथ ने कहा कि जब उल्फा के लोग समुद्र के रास्ते भारत लौटे थे तो उनके साथ लिट्टे का एक लड़ाका भी आया था और उसने असम में उल्फा के शिविरों का दौरा किया था।

सुनील नाथ ने यह खुलासा ऐसे समय में किया है, जब पिछले महीने बरामद हुए उल्फा के एक दस्तावेज से इस बात का पता चला है कि उल्फा ने हथियार खरीदने के लिए लिट्टे को 23 लाख रुपये का भुगतान किया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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