हिमाचल ने की 500 मेगावाट के ऊर्जा संयंत्र की मांग

प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रो़ प्रेम कुमार धूमल ने दिल्ली में राज्यों के ऊर्जा मंत्रियों के सम्मेलन में कहा कि सर्दियों के दौरान राज्य की विद्युत परियोजनाओं में पानी के स्तर में गिरावट आने से बिजली का उत्पादन गिर जाता है, जिससे राज्य की बिजली की जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार को बाहरी स्त्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि राज्य में हुए बड़े पैमाने पर औद्योगिकरण की वजह से वर्ष 2012 तक सर्दियों में बिजली की मांग तथा आपूर्ति में 800 मेगावाट का अन्तर आ जाएगा, जिसके स्थायी समाधान की उपयुक्त व्यवस्था करने की नितांत आवश्यकता है।

प्रो़ धूमल ने केन्द्र से गैर आवंटित कोटा के अन्तर्गत प्रतिवर्ष 15 अक्तूबर से 15 अप्रैल तक 15 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार को नीतिगत तौर पर प्रदान करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार को गैर आवंटित बिजली कोटा को तदर्थ नीति से राज्य को उचित समय पर पर्याप्त बिजली उपलब्ध नहीं हो रही है, जिसकी वजह से राज्य सरकार को मजबूरन बिजली कटौती करनी पड़ती है।

मुख्यमंत्री ने राज्य की ट्रांसमिशन लाइनों को विकसित एवं सुदृढ़ करने के लिए राज्य सरकार को उदार शतरें पर वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाने का अनुरोध करते हुए कहा कि राज्य में जल विद्युत परियोजनाओं के विकास तथा ट्रांसमिशन नेटवर्क की स्थापना के लिए अपार वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता है। उन्होंने केन्द्र सरकार के समक्ष लम्बित जनरेशन टैक्स लगाने की मांग को मंजूरी प्रदान करने का अनुरोध करते हुए इस मुद्दे पर तत्काल सकारात्मक रूख अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

प्रो़ धूमल ने कहा कि राज्य ने 95 प्रतिशत परिवारों को बिजली सुविधा उपलब्ध करवाई है, जो कि देश भर में सर्वाधिक है। उन्होंने कहा कि राज्य ने शत प्रतिशत गणना गांवों को बिजली उपलब्ध करवाई गई है एवं शत प्रतिशत उपभोक्ताओं को मीटरिंग, बिलिंग तथा कलैक्शन को भी सुनिश्चित किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि राज्य में सामूहिक तकनीकी एवं वाणिज्य नुकसान 15़1 प्रतिशत आंका गया है, जोकि देश भर में न्यूनतम है। उन्होंने बताया कि राज्य में बिजली उपभोक्ताओं को देश भर में न्यूनतम दरों पर बिजली उपलब्ध करवाई जा रही है तथा किसी भी वर्ग को मुफ्त बिजली प्रदान नहीं की जा रही है।

उन्होंने बताया कि राज्य की चिन्हित 23000 मैगावाट जल विद्युत क्षमता से अब तक 6500 मेगावाट क्षमता का दोहन किया गया है। उन्होंने कहा कि 11वीं पंचवर्षीय योजना के अंत तक लगभग 10 हजार मेगावाट जल विद्युत क्षमता का दोहन किया जाएगा, जो कि राज्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में सक्षम होगी। उन्होंने कहा कि 12वीं योजना के अंत तक राज्य में 15 हजार मेगवाट क्षमता के दोहन का लक्ष्य रखा गया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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