भारतीय फोरेंसिक विज्ञान को विश्वस्तरीय बनाने का लक्ष्य : चिदंबरम

उन्होंने कहा कि आगामी दिनों में देश में छह नई क्षेत्रीय, मोबाइल यूनिट, नई हाईटेक सेन्ट्रल लेबोरेटरी और नई हाईटैक सेन्ट्रल जीइक्यूडी प्रयोगशालाएं खोले जाने का प्रस्ताव काफी समय से विचाराधीन है ताकि भारत में अपराधों से लड़ने में मजबूती आए।

चिदम्बरम रविवार को जयपुर में 20वीं ऑल इंडिया फोरेंसिक साइंस कान्फेंस के उद्घाटन के पश्चात फोरेंसिक वैज्ञानिकों, पुलिस अधिकारियों व न्यायिक अधिकारियों को सम्बोधित कर रहे थे।

चिदम्बरम ने आशा जताई कि इस सम्मेलन में बहुत सारे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार विमर्श होगा जैसा कि इसकी थीम "क्राइम सीन से कोर्ट रूम' है पर इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात क्राइम सीन को सुरक्षित रखने की है जिससे क्राइम इन्वेस्टिगेशन सुव्यवस्थित तरीके से पूर्ण हो सके।

उन्होंने कहा कि अपराध अनुसंधान प्रक्रिया में बहुत सारे प्रकरण साक्ष्यों के अभाव में निष्फल हो जाते हैं और बहुत सारे प्रकरणों में न्याय प्रक्रिया में देरी से साक्षी हताश होकर बयान बदल देता है व कभी परिस्थितिवश या डर कर साक्ष्य पूर्ण नहीं हो पाता जिससे अपराधी सजा पाने से बच जाता है।

उन्होंने कहा कि फोरेंसिक साइंस में अपराधों से निपटने के लिए तकनीकी की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता है तो उसके सही आदान प्रदान की जिसमे अपराधों की संख्या को घटाने में मदद मिल सकें।

उन्होंने कहा कि फोरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में मानव संसाधन की कमी नहीं है कमी है तो इस भावना की कि जो भी व्यक्ति फोरेंसिक साइंस के क्षेत्र में कार्य करने आते हैं उन्हें पूर्ण ईमानदारी व निष्पक्षता से सत्य की खोज कर अनुसंधान रिपोर्ट को अन्जाम देना चाहिये ताकि कोर्ट में त्वरित न्याय मिल सके ।

उन्होंने कहा कि फोंरेसिक विज्ञानियों को चाहिए कि वे पूर्ण निष्ठा के साथ प्रयोग करें एवं तकनीकी ज्ञान का सही दिशा में इस्तेमाल कर अन्तत: सही निर्णय पर पहुंचे।

उन्होंने फोरेंसिक वैज्ञानियों से कहा कि वे विज्ञान के प्रति पूर्ण निष्ठा से कार्य करें। उनका मुख्य ध्येय सत्य की खोज ही होना चाहिए और इसमें किसी भी प्रकार की चूक नहीं होनी चाहिए इसलिए वे स्वयं इस विधा में पूर्णरूप से पारगंत होकर तकनीकी का सही दिशा में इस्तेमाल करें।

चिदंबरम ने आगामी दिनों में डीएनए डाटा मैनेजमेंट, फायर आर्म सिग्नेचर डाटा बैंक, क्राइम क्रिमिनल ट्रेकिगं सिस्टम और नेटव*++++++++++++++++++++++++++++र्*गं सिस्टम को लागू करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समय के अनुसार परिवर्तन को देखते हुए आर्म्स एक्ट में संशोधन की आवश्यकता है इसके लिए आवश्यक कार्यवाही चल रही है।

उन्होंने कहा कि संसार के 30 देशों में डीएनए विधेयक पहले से ही पारित हैं और अब डीएनए के सबंध में एक विधेयक अपने देश की संसद के समक्ष भी विचाराधीन है इसके शीघ्र ही अनुमोदित होने की संभावना है।

उल्लेखनीय है कि 17 नवम्बर तक चलने वाले इस सम्मेलन में फोरेसिंक वैज्ञानिक, न्यायिक अधिकारी, पुलिस अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ सहित देश के 22 राज्यों के लगभग 400 प्रतिनिधि भाग ले रहे है। सम्मेलन में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) और रिसर्च एंड एनालसिस विंग (रॉ) के अधिकारी भी शिरकत कर रहे हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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