ग्लेशियर के पिघलने से बनने वाली झीलें हो सकती हैं खतरनाक

बीनू जोशी

जम्मू, 14 नवंबर (आईएएनएस)। ग्लोबल वार्मिग की वजह से हिमालय के ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने से वहां कई झीले बन गई हैं क्योंकि नदियां तेजी से इस पानी को नहीं ले जा पा रही हैं। इन झीलों में पानी बहुत ज्यादा हो सकता है या उनके किनारे टूट रास्ते में आने वाले इलाकों के लिए खतरनाक हो सकते हैं।

हिमालय के ग्लेशियर उत्तरी और पूर्वी भारत की ज्यादातर नदियों के उद्गम स्थल हैं। ध्रुवों से बाहर हिमालय में ही सबसे अधिक ग्लेशियर हैं। आंकड़ों के मुताबिक हिमालय का 17 प्रतिशत हिस्सा ग्लेशियरों से बना हुआ है जबकि वहां की 30 से 40 प्रतिशत पहाड़ियों में मौसमी हिमपात होता है। एक अनुमान के मुताबिक अकेले भारतीय हिमालय में 9,500 ग्लेशियर हैं।

जम्मू विश्वविद्यालय में भूगर्भशास्त्र के प्रोफेसर जी. एम. भट ने आईएएनएस से कहा, "तापमान बढ़ने की वजह से बर्फ के तेजी से पिघलने से हिमालय के ग्लेशियरों के करीब नई झीले देखी गई हैं।"

उन्होंने कहा, "ऐसे कोई विश्वसनीय आंकड़े नहीं हैं जो बताते हों कि इस प्रवृत्ति की वजह से कितनी झीलें बनी हैं लेकिन जब इन झीलों में अतिरिक्त पानी बहेगा या जब ये झीलें अपने किनारों को तोड़ देंगी तो यकीनी तौर पर यह एक चिंता होगी।"

भट कहते हैं कि झीलों द्वारा पानी को रोके रखने से ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने के बावजूद तुलनात्मक रूप से नदियां सूखी हुई हैं।

उन्होंने कहा कि जब ये झीलें पत्थर और कंकड़ों से बने अपने किनारों को तोड़ेंगी तो बाढ़ से व्यापक तबाही हो सकती है।

भट ने कहा कि लेह की उड़ान पर जाते हुए उन्होंने कई नई झीलें देखीं। जबकि आज से 10 साल पहले तक ये झीलें नहीं थीं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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