इस्पात उत्पादन वर्ष 2012 तक 1240 लाख टन हो जाएगा (लीड-1)
मेटल्स मिनरल्स मैन्युफैक्च रिंग एक्सपो 2009 में हिस्सा लेने के बाद सिंह ने एक संवाददाता सम्मेलन में यहां कहा, "इस वर्ष (2009-10) उत्पादन छह करोड़ टन से अधिक होगा। पिछले वर्ष 5.60 करोड़ टन इस्पात का उत्पादन हुआ था।"
सिंह के अनुसार चालू वित्त वर्ष के प्रथम सात महीनों के दौरान इस्पात उत्पादन में 4-5 प्रतिशत की वृद्धि हुई और मांग में 7-9 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
सिंह ने कहा कि अधोसंरचना और आटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में तेजी के कारण घरेलू मांग में तेजी आई है।
बाद में मर्चेट चैंबर ऑफ कामर्स की ओर से आयोजित एक संगोष्ठी में सिंह ने कहा कि कच्चे लौह अयस्क का निर्यात बंद किया जाना चाहिए और इस उद्योग को मूल्य वर्धित लौह अयस्क उत्पादों के निर्यात पर ध्यान देना चाहिए।
सिंह ने कहा, "हमें हर हाल में एक ऐसी नीति अपनानी चाहिए जिसके तहत हम मूल्य वर्धित लौह अयस्क उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा दे सकें और कच्चे लौह अयस्क के निर्यात पर रोक लगा सकें।"
देश की सर्वाधिक लौह अयस्क उत्पादित करने वाली कंपनी, एनएमडीसी लिमिटेड और भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड (सेल) के विनिवेश के बारे में चर्चा करते हुए सिंह ने कहा कि दोनों प्रस्ताव दिसंबर तक कैबिनेट के समक्ष पेश कर दिए जाएंगे।
ज्ञात हो कि एनएमडीसी और सेल, दोनों सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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