बीड़ी उद्योग लील रहा है लाखों बच्चों का बचपन
नई दिल्ली, 14 नवंबर (आईएएनएस)। बाल दिवस के अवसर पर जारी सार्वजनिक स्वास्थ्य संगठनों और स्वयंसेवी संस्थाओं (एनजीओ) के एक अध्ययन के अनुसार 17 लाख से अधिक बच्चे भारतीय बीड़ी उद्योग में लगे हुए हैं। रिपोर्ट के लेखकों ने सरकार से इस मुद्दे पर तत्काल कदम उठाने को कहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार सिगरेट की तुलना में बीड़ी में तीन गुना निकोटिन और कार्बन मोनोऑक्साइड होती है।
अध्ययन के अनुसार बच्चों को बीड़ी बनाने के काम में इसलिए लगाया जाता है क्योंकि उनकी मुलायम उॅंगलियां बीड़ी लपेटने में तेज होती हैं।
अध्ययन में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले की सात वर्षीय मदहबी खातून का उदाहरण दिया गया है जो पांच वर्ष की उम्र से ही बीड़ी बना रही है और अब प्रतिदिन 400 से अधिक बीड़ी बनाती है। केवल सरकार की कार्रवाई पर ही उस जैसे बच्चों के लिए कुछ आशा बची है।
अध्ययन में कहा गया है कि बीड़ी बनाने के काम में लगे बच्चे पढ़ाई छोड़ने को बाध्य होते हैं। उनसे 14 घंटे तक काम कराया जाता है और उन्हें कोई छुट्टी भी नहीं दी जाती।
लगातार तंबाकू और अन्य रसायनों के संपर्क में रहने के कारण बच्चे तपेदिक, आंखों की तकलीफ, खून की कमी (एनिमिया), फेफड़ों और त्वचा के रोगों के शिकार होते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
**


Click it and Unblock the Notifications