'अस्पताल की लापरवाही ने ली नवजात की जान'
जिला महिला अस्पताल में रसूलपुर गांव निवासी गीता मिश्रा ने बुधवार को एक लड़के को जन्म दिया। प्रसव के बाद गीता को बेड नंबर-2 पर भेज दिया गया। कुछ देर बाद अस्पताल प्रशासन द्वारा मीरा तिवारी नाम की एक अन्य प्रसूता को बच्चे सहित उसी बेड पर लिटा दिया गया।
गीता ने कहा, "बेड पर चारों के लेटने के बाद उसमें तनिक भी जगह नहीं बची। मीरा अपने बच्चे को लेकर विपरीत दिशा में मुंह करके सो रही थीं। देर रात उन्होंने करवट ली और उनका पैर मेरे नवजात शिशु को लगा और वह नीचे गिर गया। शिशु नीचे गिरते ही जोर-जोर से रोने लगा।"
उन्होंने कहा कि वह मदद के लिए चिल्लाती रहीं लेकिन अस्पताल का कोई कर्मचारी उनके निकट नहीं आया। गिरने के बाद बच्चे को सांस लेने में तकलीफ के कारण कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई।
यह घटना बुधवार शाम की है, लेकिन अस्पताल प्रशासन को मामले को दबाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। मामला गुरुवार देर शाम प्रकाश में उस समय आया जब पीड़िता के परिजनों ने जब स्थानीय पत्रकारों से संपर्क कर घटना के बारे में बताया।
घटना के बारे में पूछे जाने पर जिले के मुख्य चिकित्साधिकारी वी.के.वर्मा ने शुक्रवार को आईएएनएस को बताया कि पीड़िता की शिकायत के बाद घटना की जांच के लिए एक दल गठित किया गया है।
एक ही बेड पर दो प्रसूताओं को लिटा देने के सवाल पर वर्मा ने कहा कि हो सकता उस समय कोई खाली बेड न रहा हो, लेकिन दोनों प्रसूताओं को एक ही बेड देने के बाद अस्पताल कर्मचारियों को लगातार निगरानी करनी चाहिए थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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