निदेशकों के हलफनामे वापस लेने की आरआईएल की सशर्त पेशकश
सर्वोच्च न्यायालय की तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई के दौरान बहस करते हुए आरआईएल के वकील हरीश साल्वे ने कहा कि यदि रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेस लिमिटेड (आरएनआरएल) अपनी याचिका से उस एक पैराग्राफ को हटा दे, जिसमें लिखा गया है कि निदेशकों ने पारिवारिक समझौते को मंजूरी दी है और उस पर कार्रवाई की है, तो वह निदेशकों का हलफनामा वापस ले लेंगे।
यह प्रस्ताव ऐसे समय में सामने आया है, जब एक दिन पहले ही आरएनआरएल की ओर से वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी ने कहा था कि वह वह आरआईए के उन सातों निदेशकों से जिरह करना चाहते हैं, जिनके हलफनामों में दावा किया गया है कि उन्हें पारिवारिक समझौते के तथ्यों के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
सर्वोच्च न्यायालय मुकेश अंबानी की कंपनी आरआईएल को आंध्र प्रदेश में आवंटित किए गए गैस कुओं से अनिल अंबानी के नेतृत्व वाली आरएनआरएल को 17 सालों तक 2.34 डॉलर प्रति यूनिट की दर प्रति दिन 2.8 करोड़ यूनिट गैस आपूर्ति करने को लेकर उपजे विवाद की सुनवाई कर रहा है।
सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश के.जी.बालाकृष्णन, न्यायमूर्ति बी.सुदर्शन रेड्डी और न्यायमूर्ति पी.सथशिवम की तीन सदस्यीय खंडपीठ मामले की सुनवाई कर रही है।
साल्वे ने कहा कि आरएनआरएल की याचिका में कहा गया है कि आरआईएल का बोर्ड पारिवारिक समझौते के तथ्यों के बारे में जानकारी रखता है। यह याचिका मुकेश अंबानी की निजी गतिविधियों को भी आरआईएल बोर्ड पर थोपना चाहती है।
इस पर जेठमलानी ने कहा कि यदि आरआईएल कानूनी आधार पर इस याचिका को गलत साबित करता है तो उसका स्वागत है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि निदेशकों की ओर से हलफनामे के रूप में सर्वोच्च न्यायालय में नए सबूत पेश किए जाएं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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