अदालत ने महिला को मुस्लिम पति के साथ जाने की अनुमति दी
दरअसल, एक गैर मुस्लिम लड़की ने एक मुस्लिम युवक से शादी कर ली थी। दोनों में प्रेम था। लड़की कर्नाटक की थी तो लड़का केरल का।
बेंगलुरु से 180 किलोमीटर दूर चामराजनगर में सिलजाराज के पिता सी. सेलवाराज ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा कि उनकी बेटी पिछले साल अगस्त से ही लापता है और उसने केरल में एक मुस्लिम लड़के के साथ शादी कर ली है।
सेलवाराज ने केरल में छपे उन पोस्टरों का हवाला देते हुए यह याचिका दायर की थी जिनमें केरल में 'प्रेम जेहाद' से बचने की चेतावनी दी गई थी। इसके तहत मुस्लिम लड़के गैर मुस्लिम लड़कियों को कथित रूप से प्रेम का झांसा देकर उनसे विवाह कर लेते हैं और बाद में उन्हें इस्लाम धर्म में परिवर्तित कर देते हैं।
कर्नाटक पुलिस ने केरल पुलिस की मदद से सिलजाराज को खोज निकाला और उसे कर्नाटक उच्च न्यायालय में न्यायाधीश श्रीधर राव और न्यायाधीश रवि मलिमथ की दो सदस्यीय खण्डपीठ के सामने 21 अक्टूबर को पेश किया था। दो सदस्यीय खण्डपीठ ने पुलिस की जांच पूरी होने तक सिलजाराज को अपने माता पिता के पास रहने का निर्देश दिया था। अदालत ने यह भी कहा कि चूंकि दोनों बालिग हैं और यदि उनकी शादी वैध पाई गई तो वे साथ भी रह सकते हैं।
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए सिलजाराज को उसके मुस्लिम पति के साथ जाने की इजाजत दे दी। पुलिस ने हालांकि प्रेम जेहाद का हवाला देते हुए मामले की जांच पूरी करने के लिए और समय की मांग की थी।
अदालत परिसर में संवाददाताओं से बात करते हुए सिलजाराज ने कहा, "यह 'प्रेम जेहाद' नहीं है और मैं अपने प्रेमी अकसार के साथ खुद गई थी।"
सिलजाराज ने अदालत में कहा कि उसने इस्लाम धर्म कबूल कर लिया है और वह धार्मिक प्रशिक्षण ले रही है।
गौरतलब है कि अदालत ने 21 अक्टूबर को सिलजाराज को तीन सप्ताह के लिए उसके परिवार के पास भेजने का आदेश दिया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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