कोड़ा ने विनोद सिन्हा की कंपनी को खदान देने की सिफारिश की थी : पूर्व सचिव
राज्य के तत्कालीन खनन व भूविज्ञान सचिव जयशंकर तिवारी ने पटना से आईएएनएस को फोन पर बताया, "जब आप व्यवस्था में काम करते हैं तो अधिकारियों को निर्देश दिए जाते हैं। मुझे भी मधु कोड़ा ने कई मौकों पर खनन संबंधी फाइलों को आगे बढ़ाने का निर्देश दिया था।"
तिवारी जनवरी 2007 से जुलाई 2008 तक इस पर थे। इसी पद पर रहते हुए वह सेवानिवृत्त भी हुए।
उन्होंने कहा, "मैं विनोद सिन्हा को अच्छे तरह जानता हूं। वह मधु कोड़ा के जरिए दबाव डलवाया करते थे।"
तिवारी ने कहा, "2007 में कोड़ा ने कोर स्टील कंपनी को लौह अयस्क की खदान देने सिफारिश की थी। हमें जैसे ही जानकारी मिली कि यह विनोद सिन्हा की कंपनी है तो हमने उसे रोक लिया।"
उन्होंने कहा, "अपने कार्यकाल के दौरान हमने कई राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय इस्पात कंपनियों को खानें आवंटित की। छोटी-मोटी इस्पात कंपनियां कोड़ा के जरिए दबाव डालकर हमें प्रभावित करने की कोशिश करती थी।"
उन्होंने कहा, "छोटी-मोटी कंपनियों के मामलों को हमने झारखण्ड राज्य खनिज विकास निगम (जेएसएमडीसी) और राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) के मार्फत देने की सिफारिश की थी लेकिन मेरे सुझाव को नकार दिया गया।"
तिवारी ने कहा, "कोड़ा ने तो एक दिन में 40 आवेदनों से संबंधित पार्टियों की फाइलें निपटा दी थी।"
उन्होंने कहा कि यह उसी दिन हुआ जिस दिन उन्होंने खनन व भूविज्ञान सचिव का पदभार संभाला था। अगले ही दिन उन्हें पंजाब विधानसभा चुनाव में बतौर पर्यवेक्षक भेज दिया गया।
तिवारी के मुताबिक उनकी अनुपस्थिति में एस. के. सत्पथी को कार्यभार सौंपा गया। उस दौरान खनन के लिए 60 आवेदन आए। सत्पथी ने संबंधित कंपनियों को प्रस्तुति देने को कहा। उनकी छवि अच्छी थी। उनका स्थानांतरण कर दिया गया। उनके स्थान पर बी. के. त्रिपाठी को सचिव पद पर बैठाया गया। त्रिपाठी ने इस पद को अस्वीकार कर दिया। उसके बाद उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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