लोक सेवा आयोग व्याख्यान माला शुरू
राष्ट्रपति ने अपने व्याख्यान में कहा कि लोक सेवा को 21वीं शताब्दी की चुनौतियों का सामना करने की आवश्यकता है क्योंकि सुशासन की अवधारणा की पुनर्विवेचना की जा रही है। उन्होंने स्थानीय संस्थानों की केन्द्रीय भूमिका वाले लोक केन्द्रित प्रशासन की वकालत की, और प्रशासन के हर स्तर पर सहयोग और संयोजन पर जोर दिया। राष्ट्रपति ने कहा कि लोक सेवकों को नैतिक मूल्यों और सिद्घांतों पर डटे रहना चाहिए।
कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री, पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि लोक सेवा को बदलते समय में जन आकांक्षाओं के अनुरूप खुद को ढालना होगा। इस अवसर पर आयोग के अध्यक्ष प्रो़ डी़ पी़ अग्रवाल ने कहा कि आयोग इस बात पर निश्चित है कि वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की चयन परीक्षा में महत्वपूर्ण बदलाव की आवश्यकता है।
आयोग ने सरकार से मौजूदा सिविल सेवा प्रारंकि परीक्षा के स्थान पर सिविल सेवा अप्टिट्यूड परीक्षा शुरू करने का सुझाव दिया है। आयोग के वरिष्ठतम सदस्य प्रो़ क़े एस़ चालन ने स्वागत भाषण और आयोग के सचिव आलोक रावत ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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