सुरक्षा परिषद के लिए भारतीय दावे का ब्रिटेन ने फिर समर्थन किया
लंदन, 12 नवंबर (आईएएनएस)। दो विश्व युद्धों में भारतीयों द्वारा किए गए बलिदान की याद में आयोजित एक समारोह में ब्रिटेन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता के भारत के दावे का फिर समर्थन किया।
हाउस ऑफ कामंस में पूर्व सैनिकों और भारतीय समुदाय के सदस्यों की उपस्थिति के बीच ब्रिटेन के अंतर्राष्ट्रीय विकास मंत्री गैरेथ थामस ने कहा, "फासिस्ट राज्य को पराजित करने के लिए आगे आकर भारतीयों ने बड़ा योगदान किया।"
प्रधानमंत्री गोर्डन ब्राउन के बदले में बोलते हुए थामस ने कहा, "हमें भारतीय सैनिकों की वर्तमान पीढ़ी को भी नहीं भूलना चाहिए जो पूरी दुनिया में संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षकों के रूप में लड़ रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के शांति प्रयासों में भारत की लगातार भागीदारी भी सुरक्षा परिषद में उसकी स्थाई सदस्यता के दावे के समर्थन का एक कारण है।"
उन्होंने कहा कि जैसे अफगानिस्तान में ब्रिटिश सैनिक खतरनाक स्थिति में हैं वैसे ही ये भारतीय सैनिक भी खतरनाक रास्ते पर हैं।
प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति के लिए 11 नवंबर को हुए समझौते की याद में स्मृति दिवस मनाने के लिए केंद्रीय लंदन स्थित अज्ञात सैनिकों के स्मारक पर भी परंपरागत समारोह आयोजित हुआ।
प्रथम विश्व युद्ध में हताहत हुए भारतीय सैनिकों के बारे में निश्चित आंकड़ें मिलना तो मुश्किल है लेकिन लंदन स्थित एक विशेषज्ञ कुसुम वादगामा के अनुसार प्रथम विश्व युद्ध में 53,486 भारतीय सैनिकों की मौत हुई, 64,350 घायल हुए और 2,937 लापता हुए।
दूसरे विश्व युद्ध में भारत में 25 लाख की स्वयंसेवी सेना तैयार की गई थी। इस युद्ध में 36,092 भारतीय सैनिक मारे गए या लापता हुए ,जबकि 34,354 घायल हुए। दोनों विश्व युद्धों में भारतीयों ने कुल 43 विक्टोरिया क्रास (ब्रिटेन का सर्वोच्च सैनिक सम्मान) हासिल किए थे।
इसके अलावा दोनों विश्वयुद्धों में लाखों भारतीयों की मौत हुई थी। ब्रिटेन की युद्धकालीन नीतियों के कारण वर्ष 1943 में पैदा अकाल के कारण ही केवल 30 लाख लोगों की मौत हुई थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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