अधिकारियों की कमी से जूझ रही है भारतीय सेना
नई दिल्ली, 12 नवंबर (आईएएनएस)। भारतीय सेना इन दिनों अधिकारियों की भारी कमी से जूझ रही है। मंदी के बावजूद वह प्रतिभाओं को आकर्षित करने और उनके विदेश पलायन को रोकने में नाकाम रही है। वर्ष 2008 में सेना में 1,500 नए अधिकारी शामिल हुए थे लेकिन करीब 1,800 अधिकारियों ने सेना को छोड़ दिया था।
फिलहाल सेना 11,238 अधिकारियों की कमी का सामना कर रही है।
इस स्थिति पर एक वरिष्ठ अधिकारी ने आईएएनएस से कहा, "यह एक बहुत ही अजीब स्थिति है। मंदी और हमारी आवश्यकताओं में छूट मिलने के बावजूद सेना में आने वाले अधिकारियों की अपेक्षा सेना छोड़ने वाले अधिकारियों की संख्या ज्यादा है।"
उन्होंने कहा, "चिंता की बात यह है कि आर्थिक मंदी के बावजूद नकारात्मक प्रवाह देखा जा रहा है।"
2007 से ही सेना में अधिकारियों का नकारात्मक प्रवाह देखा जा रहा है जब 1,780 अधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया था या वे सेवानिवृत्त हो गए थे। जबकि केवल 1,750 नए अधिकारी ही सेना में शामिल हुए थे।
सेना ने 2005 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के 535 आवेदन, 2006 में 810 और 2007 में 1,265 आवेदन प्राप्त किए थे। रक्षा मंत्रालय की सेवानिवृत्ति को मंजूरी सशस्त्र बलों की आवश्यकताओं पर निर्भर करती है। सेना ने 2005 में 365, 2006 में 464 और 2007 में 608 अधिकारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की अनुमति दी थी।
एक अन्य अधिकारी का कहना है, "स्थितियों को देखते हुए हमने यह आवश्यक कर दिया है कि 15 वर्ष से कम समय तक नौकरी करने वाले अधिकारी केवल चिकित्सकीय आधार पर ही समय से पहले सेवानिवृत्ति ले सकते हैं या इस्तीफा दे सकते हैं।"
सेना में 46,615 अधिकारियों की आवश्यकता है लेकिन वहां 11,238 अधिकारियों की कमी है। समस्या तब बढ़ गई जब पिछले तीन सालों में करीब 3,000 अधिकारियों ने समय से पहले सेवानिवृत्ति ले ली।
2009 के आंकड़े अब तक संकलित नहीं किए गए हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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