एक मदरसा, जहां वंदे मातरम् के साथ होता है कुरान का पाठ (फोटो के साथ)

लखनऊ, 12 नवंबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश का एक मदरसा राष्ट्र गीत वंदे मातरम् पर छिड़ी हर बहस को झुठला रहा है। यहां न सिर्फ रोजाना वंदे मातरम के गायन के बाद पवित्र कुरान पढ़ाई जाती है बल्कि गीता और रामायण का भी पाठ होता है।

अंबेडकरनगर जिले के सतासीपुर स्थित नियामत-उलूम मदरसे में यह सिलसिला विगत 30 वर्षो से चल रहा है। यहां के शिक्षक और बच्चे हाल ही वंदे मातरम् के खिलाफ जारी फतवे का विरोध करते हुए एक सुर में कहते हैं कि वे हर वह कोशिश करेंगे जिससे कौमी एकता को बढ़ावा मिले।

मदरसे के संस्थापक एवं प्राधानाचार्य मौलवी मेहराब हासिम ने गुरुवार को आईएएनएस से बातचीत में कहा, "राष्ट्रहित से ऊंचा कोई नहीं है और वंदे मातरम् तो हमारे देश का गुणगान है। ऐसे में यह समझ में नहीं आ रहा है कि वंदे मातरम् गाने पर कुछ धर्म के ठेकेदारों ने क्यों ऐतराज जताया है। ये शर्मनाक, गंभीर और सोचनीय है।"

इस मदरसे में 200 छात्र हैं और अहम बात यह कि इनमें से 30 हिंदू हैं। मध्यान समाप्त होने के बाद पढ़ाई शुरू होने के पहले इस मदरसे में एक और खास नजारा देखने को मिलता है, जब सभी छात्र कतार में खड़े होकर गायत्री मंत्र का पाठ करते हैं।

बच्चों को गायत्री मंत्र के उच्चारण कराने वाला छठी कक्षा का छात्र रईस अहमद का कहना है, "यहां पढ़ने पर गर्व महसूस होता है। हम एक साथ पढ़ते, खेलते और मिल-बांटकर खाते हैं। धर्म हमें नहीं बांध सकता। मास्टर जी कहते हैं कि हम एक ही खुदा के बनाए हुए हैं।"

मौलवी मेहराब हासिम ने सन् 1976 में इस मदरसे की स्थापना की थी। इस मदरसे को सरकार द्वारा कोई वित्तीय सहयोग नहीं मिलता है। यहां के लोग ही चंदा इकट्ठा करके मदरसे को दान करते हैं।

संस्कृत पढ़ाने वाले शिक्षक अब्दुल कलाम कहते हैं कि इस मदरसे से उन लोगों को सीख लेनी चाहिए जिनका काम एक-दूसरे को लड़वाना है। यहां शिक्षकों का एक ही मकसद है-गीता, कुरान और रामायण की तालीम देकर छात्रों को बेहतर इंसान बनाना।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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