उत्तरी हिंद महासागर में आने वाला अगला चक्रवात होगा 'वार्ड'
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) और संयुक्त राष्ट्र के एशिया और प्रशांत के आर्थिक एवं सामाजिक आयोग (ईएससीएपी) की व्यवस्थित प्रक्रिया के तरह चक्रवातों के नाम तय किए जाते हैं।
बुधवार को भारत के पश्चिमी तटों को प्रभावित करने वाले चक्रवात 'फयान' को यह नाम म्यांमार ने दिया था। उत्तरी हिंद महासागर क्षेत्र में देश को प्रभावित करने वाले अगले चक्रवात को 'वार्ड' कहा जाएगा। यह नाम ओमान ने दिया है। इसके बाद आने वाले अगले चक्रवात को 'लैला' कहेंगे, यह नाम पाकिस्तान ने दिया है।
आठ उत्तरी हिंद महासागर देशों- बांग्लादेश, भारत, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, श्रीलंका और थाईलैंड ने 64 नामों की एक सूची तैयार की है। वास्तव में मौसम विज्ञान विभाग के अधिकारियों ने 2009 के अंत तक के चक्रवातों के नाम तय कर लिए थे।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अतिरिक्त महानिदेशक डी. चक्रवर्ती ने आईएएनएस से कहा, "चक्रवातों को एक पहचान देना बेहतर है क्योंकि चक्रवात के नामकरण का मकसद यह है कि एक क्षेत्र के लोग इसे आसानी से समझ और याद रख सकें। साथ ही चक्रवात की आपदा के प्रति खतरे के लिए जागरूकता, इससे निपटने की तैयारियां व प्रबंधन करना और खतरे को कम करना भी एक मकसद है।"
चक्रवर्ती कहते हैं कि चक्रवात के नाम इस तरह से इसलिए चुने जाते हैं ताकि स्थानीय लोग इन्हें आसानी से समझ सकें।
2004 से अब तक इन आठ देशों ने 20 चक्रवातों का सामना किया है। इनमें से अंतिम छह थे- नर्गिस (पाकिस्तान), रश्मि (श्रीलंका), खाई-मुक (थाईलैंड), निशा (बांग्लादेश), बिजली (भारत) और आइला (मालदीव)।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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