शिक्षा के अधिकार के लिए 10 लाख अतिरिक्त शिक्षक चाहिए : प्रधानमंत्री (लीड-1)
देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती के मौके पर आयोजित राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा, "शिक्षा के अधिकार को हासिल के उद्देश्य की पूर्ति के लिए न सिर्फ प्रशिक्षण संस्थानों के गठन की आवश्यकता है बल्कि शिक्षक के पेशे का समाज में सम्मान और उसके दर्जे को पुनर्स्थापित करने की आवश्यकता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि शिक्षा तक लोगों की व्यापक पहुंच सुनिश्चित करना ही काफी नहीं है बल्कि इसे गुणवत्तापरक भी बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार देश के हर बच्चे को अच्छी और गुणवत्तापरक शिक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा, "हमारी सरकार देश के हर बच्चे को खासकर समाज के पिछड़े वर्ग के बच्चों को अच्छी और गुणवत्तापरक शिक्षा देने को लेकर कटिबद्ध है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक समुदाय के जो लोग अपने बच्चों की शिक्षा का खर्च वहन करने में असमर्थ हैं, उनके लिए सरकार ने कई छात्रवृत्ति योजनाएं आरंभ की है।"
उन्होंने कहा, "महिलाओं को शिक्षित करने के महत्व को हम समझते हैं। इसीलिए साक्षर भारती मिशन में उनका खासा ध्यान रखा जा रहा है।"
उन्होंने कहा, "हमें अपने नामचीन संस्थानों में प्रतिभावान लोगों को आकर्षित करने के रास्ते निकालने पड़ेंगे। हमें भारतीय प्रौद्योगिक संस्थानों (आईआईटी) में शीर्ष स्तर के प्रोफेसरों व लेक्च ररों की नियुक्तियों में परेशानियां का सामना करना पड़ता है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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