पारिवारिक समझौते को मानने के लिए बाध्य नहीं है आरआईएल : वकील
कृष्णा-गोदावरी गैस विवाद पर जारी सुनवाई के दौरान आरआईएल के वकील हरीश साल्वे ने इस बारे में बंबई उच्च न्यायालय के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि दो व्यक्तियों के बीच हुए निजी समझौते को एक कारपोरेट संस्था और उसके शेयरधारकों पर लागू नहीं किया जा सकता।
अपने मुवक्किल पर पारिवारिक समझौते को लागू करने की वैधता को लेकर सवाल उठाते हुए साल्वे ने कहा, "समझौते के दस्तावेज को आरआईएल के निदेशक मंडल के समक्ष पेश नहीं किया गया था और इस बारे में अदालत को इससे पहले नहीं बताया गया था। इसे आरआईएल के शेयरधारकों के समक्ष भी पेश नहीं किया गया था।"
साल्वे ने ये तर्क प्रधान न्यायाधीश के. जी. बालाकृष्णन, न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी और न्यायाधीश पी. सथशिवम की खंडपीठ के समक्ष दिए।
कृष्णा गोदावरी बेसिन से निकलने वाली गैस की आपूर्ति और कीमत को लेकर आरआईएल और अनिल अंबानी समूह के बीच विवाद है। पारिवारिक समझौते के मुताबिक आरआईएल को रिलायंस नेचुरल र्सिोसेज को 2.34 डॉलर प्रति बैरल के हिसाब से 17 वर्षो तक 2.8 करोड यूनिट गैस की आपूर्ति करनी है जिसे वह मानने से इंकार कर रही है।
शीर्ष अदालत में साल्वे ने कहा कि पारिवारिक समझौता परिकल्पित था और इसे संतोषजनक समझौते तक पहुंचने के लिए केवल एक निर्देशिका के रूप में देखा जा सकता हैं।
उन्होंने कहा कि यदि आरआईएल के चेयरमैन ने इसपर हस्ताक्षर किए हैं तो भी यह कोई मायने नहीं रखता। आरआईएल के निदेशक मंडल ने इसे कभी मंजूरी नहीं दी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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