मोतियों से चमकते दांत चाहिए, तो चिंता दूर भगाइए!
यह बात आस्ट्रेलिया के 'डुनेडिन मल्टीडिसीप्लिनरी हेल्थ एंड डेवलपमेंट स्टडी' के एक ताजा अध्ययन में सामने आई है। इस अध्ययन में 15 से 32 वर्ष आयु वर्ग के 1,037 लोगों को शामिल किया गया। समूह के एक चौथाई लोगों को दांत संबंधी परेशानियां थीं।
उन्हें तीन समूहों में रखा गया। एक वे जो हमेशा दांतों को लेकर चिंतित रहे, दूसरे वे जिनमें किशोरावस्था में दांत की तकलीफ हुईं और तीसरे समूह के लोगों को प्रौढ़ावस्था में यह तकलीफ शुरू हुई।
हमेशा दांतों को लेकर चिंतित रहने वाले समूह के लोगों में पांच साल की उम्र में दांतों से जुड़ी परेशानियां हुईं और उन्हें कई बार दंत चिकित्सकों के पास जाना पड़ा।
प्रौढ़ावस्था में चिंतित रहने वाले समूह के लोग 26 से 32 वर्ष की आयु में दांत झड़ने जैसी परेशानियों से ग्रस्त रहे जबकि दांतों को लेकर चिंतित रहने वाले किशोर वय के लोगों को 15 वर्ष की आयु में दांतों की तकलीफ झेलनी पड़ी।
ऐसे लोग दंत चिकित्सक के पास जाकर इलाज कराने से बचते हैं। वे तब तक चिकित्सक के पास नहीं जाते जब तक कि परेशानी गंभीर रूप से न बढ़ जाए और इलाज कराना आवश्यक न हो जाए।
ओटागो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मुरे थॉमसन के नेतृत्व में हुए इस अध्ययन के मुताबिक दांतों को लेकर चिंतित रहने और चिकित्सक के पास जाने में कोताही करने से इलाज में हुई देरी के परिणामस्वरूप ऐसे लोगों की दांतों संबंधी चिंता और बढ़ जाती है। ऐसे लोगों के अधिक दांत गिरते हैं और बचे हुए दांतों का क्षरण होता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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