भोपाल के यूनियन कार्बाइड कारखाने को देख सकेगा आम आदमी
आगामी 3 दिसंबर को भोपाल गैस त्रासदी को 25 साल पूरे हो जाएंगे। यह कारखाना कैसा है, हादसे के वक्त कहां से गैस रिसी थी, मौत का वह कुआं कौन सा है जिसमें से कई शव निकाले गए थे, इसे आम लोगों ने अब तक देखा नहीं है। त्रासदी के 25 साल पूरे होने के मौके पर यूनियन कार्बाइड कारखाने को आम लोगों के लिए खोला जा रहा है।
यह कारखाना 20 नवंबर से पांच दिसंबर तक आम आदमी के लिए खोल दिया जाएगा। इसके लिए कारखाने से 25 फीट दूर बेरीकेट्स लगाए जाएंगे। प्रदेश के गैस त्रासदी एवं पुनर्वास मंत्री बाबूलाल गौर ने प्रशासनिक अमले के साथ सोमवार शाम कारखाने का निरीक्षण किया।
गौर का कहना है कि कारखाने को आम लोगों के लिए खोलने के पीछे मकसद यह है कि लोग जान सकें कि कारखाने में खतरनाक रासायनिक कचरा नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभिन्न वैज्ञानिक संगठन कचरे का परीक्षण कर स्पष्ट कर चुके हैं कि कारखाने में मौजूद अपशिष्ट खतरनाक नहीं है। इतना ही नहीं कारखाने परिसर में लगे वृक्ष और घास-फूस भी अपशिष्ट के खतरनाक नहीं होने की पुष्टि करते हैं।
गौर ने बताया कि गैस त्रासदी एक्ट 1985 के अंतर्गत केंद्र सरकार ने गैस पीड़ितों को मदद देने की पूरी जिम्मेदारी ली थी। इसके बावजूद 1999 से अब तक कोई राशि केंद्र सरकार ने नहीं दी है। राज्य सरकार गैस पीड़ितों पर 250 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है। राज्य सरकार ने 982 करोड़ रुपये की कार्य योजना केंद्र को भेजी है जो मंजूर की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार एक स्मारक भी बनाना चाहती है। इसके लिए राज्य सरकार ने 11 करोड़ रुपये भी मंजूर किए हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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