राजनीति में धनबल के बढ़ते प्रभाव पर शरद यादव ने जताई चिंता
यादव ने मंगलवार को संवाददाताओं से चर्चा में कहा, "हमारे लोकतंत्र में धन बल हावी होता जा रहा है। अब समय आ गया है कि लोकतंत्र से प्रेम करने वाले सभी लोग धनबल के खतरों से जागरूक हो जाएं।"
उन्होंने कहा, "हमने हाल ही में देखा कि कर्नाटक में धनबल ने जनादेश को किस प्रकार चुनौती दी। राजनीतिक दलों में आपसी मतभेद हो सकते हैं। कई दलों को तो इसके लिए सत्ता तक गंवानी पड़ी है लेकिन हमने कर्नाटक में जो देखा वह बिल्कुल अलग था। यहां तो धनबल ने चुनी हुई सरकार को ही सीधे तौर पर चुनौती दे दी।"
जद(यू) अध्यक्ष ने कहा, "आंध्र प्रदेश में भी हाल ही में यही देखने को मिला। धनबल ने कैसे एक नौसिखिए को मुख्यमंत्री बनाने के लिए मुहिम चलाई। मधु कोड़ा की घटना भी इसलिए हुई क्योंकि सरकार और धनबल एक हो गए। ऐसा लगता है कि कोड़ा सरकार चलाने के लिए नहीं बल्कि व्यापार करने के लिए मुख्यमंत्री बने थे।"
यादव ने नक्सलवाद की समस्या के राजनीतिक हल की मांग करते हुए कहा, "नक्सलवाद की समस्या अधिकांशत: जनजातीय बहुल क्षेत्रों में हैं। वे क्षेत्र विकास से कोसों दूर रह गए हैं। जब से बाजारवाद हावी हुआ हैं विदेशी और देशी कंपनियां लूट खसोट करने के लिए इन क्षेत्रों की ओर दौड़ रही हैं।"
उन्होंने कहा, "राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (नरेगा) पांच फीसदी जनजातीय बहुल क्षेत्रों में भी नहीं पहुंच पाई है। सरकार को ऐसे इलाकों को चिह्न्ति करना चाहिए और वहां के सामाजिक और आर्थिक विकास की दिशा में कदम उठाने चाहिए।"
इंडो-एशियन न्यू सर्विस।
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