जूनियर डाक्टरों की हड़ताल बेवजह : स्वास्थ्य मंत्री (लीड-1)
पटना में पत्रकारों से चर्चा करते हुए राज्य के स्वास्थ्य मंत्री नंदकिशोर यादव ने कहा कि पीएमसीएच के जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल बेवजह है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले ही उनकी सभी मांगों को मान लिया है और इस दिशा में कार्य प्रगति पर हैं। उन्होंने कहा कि उनके स्टाइपेंड संबंधित कागजात वित्त विभाग को भेज दिए गए हैं।
यादव ने कहा कि इसकी जानकारी भी जूनियर डॉक्टरों को है। उन्होंने हड़ताल पर गए सभी जूनियर डॉक्टरों से काम पर लौट आने की अपील की है।
जूनियर डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने के कारण पीएमसीएच की चिकित्सा व्यवस्था चरमरा गई है। मंगलवार को आए मरीजों को हड़ताल की वजह से मजबूरन निजी नर्सिंग होम की ओर रुख करना पड़ रहा है।
जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के महासचिव डा. धनंजय ने मंगलवार को बताया कि सरकार ने पूर्व में दिए गए आश्वासन को अब तक पूरा नहीं किया है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्यों में जूनियर डॉक्टरों को स्टाइपेंड के रूप में प्रतिमाह 25,000 से 30,000 रुपये मिलते हैं परंतु उन्हें सिर्फ 13,000 रुपये प्रतिमाह दिया जाता है।
उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा दी गई समय सीमा गुजर जाने के बाद उनके हड़ताल पर जाने के अलावा अब कोई रास्ता नहीं बचा था। उन्होंने बताया कि जूनियर डाक्टर हड़ताल के दौरान आपातकालीन, बाह्य एवं आंतरिक चिकित्या सेवाएं ठप रखेंगे।
अस्पताल के अधीक्षक डॉ़ ओ़ पी़ चौधरी ने बताया कि हड़ताल से निपटने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग से अतिरिक्त चिकित्सकों की मांग की गई है।
उल्लेखनीय है कि इसी मांग को लेकर जूनियर डॉक्टरों ने इससे पहले 26 अगस्त से 30 अगस्त तक हड़ताल की थी और काम पर नहीं आए थे। तब राज्य के स्वास्थ्य मंत्री नंद किशोर यादव ने आश्वासन दिया था कि स्टाइपेंड की राशि 13 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दी जाएगी और उसका भुगतान 15 अक्टूबर तक कर दिया जाएगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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