शिवसेना कार्यकर्ताओं ने आजमी को 'तंदूरी' बना दिया होता : बाल ठाकरे

पार्टी के मुख पत्र 'सामना' के संपादकीय में ठाकरे ने कहा है कि महाराष्ट्र से निर्वाचित होने के बावजूद आजमी ने विधायक के रूप में मराठी के बदले हिंदी में शपथ ली, जिस पर महाराष्ट्र नव निर्माण सेना (मनसे) के विधायकों ने उनकी पिटाई की।

इस बात पर जोर देते हुए कि सेना का जन्म मराठी अस्मिता के मुद्दे पर हुआ था, ठाकरे ने कहा है कि अतीत में शिव सेना ने राज्य विधानसभा में हिंदी और अंग्रेजी के इस्तेमाल के खिलाफ इस तरह के कई सारे अभियान चलाए थे, खासतौर से शिव सेना के वरिष्ठ सदस्य दिवाकर रावते ने।

संपादकीय में घोषणा की गई है, "यदि आजमी जैसा कोई व्यक्ति रावते के हाथों लग गया होता तो उन्होंने उसको 'तंदूरी' बना दिया होता और उसकी चमड़ी उधेड़ डाली होती।"

ठाकरे ने लिखा है, "मराठी अस्मिता शिव सेना का हमेशा से सिद्धांत रहा है और भविष्य में भी वह शिव सेना का सिद्धांत रहेगा।"

लेकिन ठाकरे ने यहीं पर विधानसभा के भीतर मनसे विधायकों के हिंसक व्यवहार के लिए उन्हें आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा है कि विधानसभा में सोमवार को मनसे विधायकों द्वारा की गई हिंसक कार्रवाई का कोई समर्थन नहीं कर सकता।

संपादकीय में लिखा गया है, "विधानसभा या संसद की कार्यवाही को नियम और कानून के मुताबिक चलना चाहिए। उसे अखाड़े में या सब्जी मंडी के रूप में नहीं बदला जाना चाहिए।"

दूसरी ओर सपा की राज्य इकाई के अध्यक्ष अबु आसिम आजमी ने बाल ठाकरे के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा, "बाल ठाकरे अपने जीवन के अंतिम दिन गिन रहे हैं और ऐसे समय में वह अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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