विकास के लिए मजबूत घरेलू मांग की जरूरत : मुखर्जी
मुखर्जी ने यहां विश्व आर्थिक फोरम के भारत आर्थिक सम्मेलन में कहा, "कुछ कारणों से हमें सुधार के कदम उठाने पड़ेंगे। लेकिन मैं मानता हूं कि मजबूत घरेलू मांग की जरूरत है और हम इसे सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं।"
उन्होंने कहा कि किसी भी तरह का संरक्षणवाद अर्थव्यवस्था में सुधार की प्रक्रिया को बाधित करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक विकसित अर्थव्यवस्थाएं पटरी पर नहीं आ जातीं तब तक उठाए गए वित्तीय कदमों को जारी रखना पड़ेगा।
मुखर्जी ने कहा, "घरेलू मांग पैदा करने के लिए सरकार को कुछ और समय तक वित्तीय कदमों को जारी रखना होगा।"
उन्होंने कहा कि वर्ष 2012 तक देश की विकास दर नौ फीसदी के स्तर तक पहुंच जाएगी। उन्होंने कहा, "मैं सोचता हूं कि 11वीं पंचवर्षीय योजना (2012 तक) की समाप्ति तक हम नौ फीसदी के स्तर तक पहुंच जाएंगे।"
उन्होंने कहा, "अगले साल तक हम सात फीसदी और इसके बाद के साल तक आठ फीसदी की दर हासिल कर लेंगे। इसके बाद 11वीं योजना के बाकी के दो सालों में नौ से 10 फीसदी की विकास दर संभव हो सकेगी।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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