उड़ीसा के ग्रामीणों ने दुर्लभ कछुए को छोड़ने से मना किया
भुवनेश्वर से 150 किलोमीटर दूर स्थित तटीय जिले केंद्रपाड़ा के खादीपाला गांव के निवासियों के पास वन्यजीव अधिकारी कई चक्कर लगा चुके हैं और उन्होंने ग्रामीणों को बहुत समझाने की कोशिश की कि एक लुप्तप्राय कछुए को कैद में रखना गैरकानूनी है।
प्रभागीय वन अधिकारी प्रसन्ना कुमार बेहरा ने आईएएनएस से कहा, "ग्रामीण कुछ सुनने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने उसे छोड़ने से इंकार कर दिया है। उनका कहना है कि कछुआ भगवान का अवतार है।"
बेहरा कहते हैं, "हम उन्हें मनाने के कई प्रयास कर रहे हैं। यदि वे हमारी बात नहीं सुनते हैं तो हम वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे।"
गुरुवार को एक नजदीकी नदी से एक स्थानीय व्यक्ति रमेश पात्रा कछुए को पकड़कर गांव में ले आए थे। कछुए को गांव के एक मंदिर में एक जल संग्रह में रखा गया है।
कछुए के दर्शन करने के लिए ग्रामीणों की भीड़ लगी रहती है। लोग कछुए की पूजा कर रहे हैं। कछुए की पीठ पर भगवान जगन्नाथ की आंखों जैसी आकृति होने की वजह से उसे भगवान का अवतार माना जा रहा है।
वन्यजीव विभाग कछुए को नंदनकानन चिड़ियाघर लाना चाहता है ताकि वहां पर कछुए का संरक्षण हो सके।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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