महाराष्ट्र विधानसभा में मराठी के नाम पर मनसे की गुंडागर्दी (राउंडअप)
मनसे के जिन चार विधायकों को निलंबित किया गया है वे हैं-शिशिर शिंदे, राम कदम, वसंत गीते और रमेश बांजले। संसदीय कार्यमंत्री हर्षवर्धन पाटिल ने इन विधायकों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश किया जिसे विधानसभा ने पारित कर दिया। विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर गनपतराव देशमुख ने इस प्रस्ताव के पारित होने की घोषणा की।
निलंबित विधायकों को यह भी निर्देश दिया गया है कि विधानसभा का सत्र चलने के दौरान वह मुंबई और नागपुर शहर में प्रवेश न करे।
विधानसभा की कार्यवाही आज सुबह नवनिर्वाचित विधायकों के शपथ ग्रहण के साथ शुरू हुई। इससे पहले मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने कथित तौर पर सभी 288 विधायकों से एक खुले पत्र के माध्यम से मराठी में शपथ लेने की अपील की थी।
जब आजमी की शपथ लेने की बारी आई तो उन्होंने हिंदी में शपथ लेनी शुरू की। मनसे सदस्यों ने इसका विरोध किया और वे नारेबाजी करते हुए विधानसभा अध्यक्ष के आसन के समीप आ गए। आजमी अभी शपथ ले ही रहे थे कि मनसे सदस्य रमेश बांजले ने माइक्रोफोन उठाकर फेंक दिया। मनसे के अन्य सदस्यों ने आजमी को घेर लिया और उनके साथ हाथापाई करना आरंभ कर दिया।
मनसे सदस्य राम कदम को आजमी पर थप्पड़ जड़ते और सीने और कंधों पर वार करते भी देखा गया। लगभग सभी समाचार चैनलों ने उन्हें ऐसा करते दिखाया।
सदन में हुई इस घटना से भौंचक कांग्रेस के राजेन्द्र दर्डा, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के अजीत पवार सहित कई अन्य सदस्य आजमी की ओर लपके और मनसे सदस्यों से उन्हें बचाने की कोशिश की लेकिन मनसे सदस्यों ने बचाने आए सदस्यों के साथ भी धक्का-मुक्की की।
इसके तत्काल बाद विधानसभा के प्रोटेम अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी।
इस घटना का असर मुंबई की सड़कों पर भी दिखा। ठाणे जिले के भिवंडी में सपा समर्थकों ने सरकारी बसों पर पथराव किया जबकि जोगेश्वरी इलाके में राज ठाकरे के पुतले जलाए गए।
इस घटना के बाद सदन के बाहर विधानसभा परिसर में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान आजमी ने राज ठाकरे की गिरफ्तारी की मांग की। उन्होंने कहा, "मैंने हिंदी में शपथ लेकर कुछ भी गलत नहीं किया। यह हमारी राष्ट्र भाषा है और मैंने उसका सम्मान किया है।"
उन्होंने कहा कि चूंकि मनसे सदस्यों ने सदन की गरिमा का और राष्ट्रभाषा का अपमान किया है, इसलिए राज ठाकरे को तत्काल गिरफ्तार किया जाना चाहिए।
आजमी ने कहा कि वह पहले ही स्पष्ट कर चुके थे कि उन्हें मराठी नहीं आती है और वह मराठी सीख रहे हैं। उन्होंने कहा, "मैं राष्ट्रभाषा का अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकता।"
उन्होंने कहा, "एक सदस्य (बाबा सिद्दीकी-कांग्रेस) ने तो अंग्रेजी में शपथ ली लेकिन किसी ने उनका विरोध नहीं किया।"
मनसे विधायकों द्वारा आजमी के साथ विधानसभा के भीतर की गई हाथापाई की घटना की सभी दलों ने निंदा की है।
कांग्रेस ने इस घटना के लिए मनसे की आलोचना की। पार्टी के वरिष्ठ नेता सत्यव्रत चुतर्वेदी ने कहा, "विधानसभा के सदन में शालीनता को ताक पर रखकर इस तरह की घटना को अंजाम देना निंदनीय है। हम मनसे के इस रुख की आलोचना करते हैं।"
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शाहनवाज हुसैन ने कहा, "इस घटना की जितनी निंदा की जाए वह कम है। सदन की गरिमा को इस तरह नहीं गिराना चाहिए। लोकतंत्र में ऐसी घटनाओं के लिए कोई स्थान नहीं है।"
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना में पत्रकारों से बातचीत में कहा, "यह अचंभित करने वाली घटना है। हिंदी में शपथ लेने के लिए विधानसभा सदन में एक निर्वाचित विधायक पर कैसे कोई हमला कर सकता है। हर किसी को इस घटना की निंदा करनी चाहिए।"
सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने लखनऊ में कहा कि अबू आजमी ने हिंदी में शपथ लेकर राष्ट्रभाषा का सम्मान किया है। देश की जनता आजमी की प्रशंसा करेगी।
उन्होंने कहा, "विधानसभा के अंदर इस तरह की घटना नहीं होनी चाहिए थी। जो भी हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण है। आजमी के साथ हाथापाई करने वाले मनसे विधायक देशद्रोही हैं और उन्होंने (मनसे विधायकों) आजमी के साथ ऐसा करके राष्ट्रभाषा का अपमान किया है।"
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) ने भी इस घटना की निंदा करते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।
राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "यह बेहद ही शर्मनाक घटना है। इसकी जितनी निंदा की जाए, कम है।"
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से इस मामले पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं से देश बंट जाएगा। इस घटना के लिए उन्होंने शिवसेना और मनसे दोनों को जिम्मेदार ठहराया।
लोजपा अध्यक्ष रामविलास पासवान ने इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रभाषा हिंदी के विरोधी मनसे विधायकों की सदस्यता समाप्त कर देनी चाहिए तथा उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत गिरफ्तार किया जाना चाहिए।
पासवान ने कहा कि वोट की खातिर ऐसे लोग देश बांटने पर तुले हुए हैं। उन्होंने कहा कि देशभक्त लोगों को मिलकर तथा इस विचार कर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाने चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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