किसानों ने रेलगाड़ियां रोकीं और राजमार्ग जाम किए, पुलिस से झ्झड़प (लीड-2)
प्रदर्शनकारी किसानों ने जहां बागपत में रेल की पटरियां उखाड़ दी, वहीं मेरठ व गाजियाबाद में रेलगाड़ियां रोकीं, जिससे घंटों तक रेलगाड़ियों का परिचालन प्रभावित रहा।
बागपत के पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार ने बताया कि तड़के से ही किसानों ने जिले के बावली रेलवे स्टेशन के निकट रेलमार्ग की फिश प्लेटें उखाड़ दीं, इससे सहारनपुर-बागपत-दिल्ली रेलमार्ग बाधित रहा।
मेरठ में प्रदर्शनकारी किसानों ने रेलगाड़ियां रोकीं और दौराला, परतापुर और सरधना सहित अन्य इलाकों में राजमार्ग जाम कर यातायात बाधित किया। मेरठ राजकीय रेलवे पुलिस के चौकी प्रभारी एस.के.राणा ने आईएएनएस को बताया कि मेरठ के समीप सकोती स्टेशन पर आक्रोशित किसानों ने शालीमार एक्सप्रेस, दिल्ली-मुजफ्फरनगर एक्सप्रेस और मेरठ-दिल्ली पैसेंजर को घंटों रोके रखा।
सड़कों पर उतरे किसानों के साथ राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के कार्यकर्ता भी शामिल हुए। उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में राज्य सरकार के खिलाफ नारे लगाकर केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार का पुतला फूंका। इस दौरान कई जगह पुलिस को हालात काबू में करने के लिए किसानों पर लाठीचार्ज करना पड़ा।
बागपत के बड़ौत में जबरन दुकानें बंद करवा रहे किसानों की पुलिस से हिंसक झ्झड़प हो गई। इस दौरान पुलिस ने किसानों पर लाठीचार्ज किया। दीपक कुमार ने कहा कि स्थिति नियंत्रण में करने के लिए हल्का बल का प्रयोग किया गया। हालांकि लाठीचार्ज में किसी को गंभीर चोटें नहीं आईं। मुजफ्फरनगर के शामली कस्बे में भी पुलिस से हाथापाई कर रहे किसानों पर लाठियां भांजी गईं।
घंटों जद्दोजहद के बाद पुलिस को राजमार्गो को खुलवाने में सफलता मिली। शाम करीब 5.30 बजे के बाद पश्चिमी जिलों से जाने वाले राजमार्गो पर यातायात सुचारू रूप से शुरू हो सका।
उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार द्वारा गóो का समर्थन मूल्य 165 रुपये प्रति क्विंटल व केंद्र सरकार द्वारा उससे भी कम 129.85 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित करने और उचित एवं लाभकारी मूल्य व्यवस्था (एफआरपी) तय करने का किसान विरोध कर रहे हैं। गन्ना किसान प्रति क्विंटल 280 रुपये से ऊपर कीमत की मांग कर रहे हैं।
केंद्र सरकार ने हाल ही में एक अध्यादेश जारी कर न्यूनतम वैधानिक मूल्य (एसएमपी) समाप्त करके उसके स्थान पर उचित एवं लाभकारी मूल्य व्यवस्था (एफआरपी) लागू कर गन्ना मूल्य 129.85 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था।
इसके विरोध में गत चार नवंबर को रालोद ने मेरठ में किसानों की एक महापंचायत कर सरकार को नौ नवंबर तक वाजिब गन्ना मूल्य की घोषणा करने की मांग की थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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