कर्नाटक की एकमात्र महिला मंत्री ने इस्तीफा दिया (लीड-1)
एक आधिकारिक प्रवक्ता ने आईएएनएस को बताया कि येदियुरप्पा ने करंदलजे का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है और उसे राज्यपाल हंसराज भारद्वाज को भेज दिया है।
करंदलजे को येदियुरप्पा का करीबी माना जाता है। येदियुरप्पा के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले रेड्डी बंधुओं का आरोप था कि करंदलजे मुख्यमंत्री की तरह बर्ताव करती हैं और अन्य मंत्रालयों के कामकाज में दखल देती हैं।
उल्लेखनीय है कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने पिछले लगभग एक पखवाड़े से नेतृत्व परिवर्तन की मांग को लेकर कर्नाटक में चले आ रहे राजनीतिक संकट को रविवार को सुलझा लेने का दावा किया था।
सुषमा ने रविवार को कहा था, "मुझे यह बताकर बहुत खुशी हो रही है कि संकट का शांतिपूर्ण हल हो गया है। दोनों के बीच कुछ गलतफहमियां पैदा हो गई थी जिन्हें कुछ बैठकों के बाद सुलझा लिया गया।"
उन्होंने कहा था, "येदियुरप्पा और रेड्डी दोनों ने भाइयों की तरह काम करने और कर्नाटक की जनता की सेवा करने का फैसला किया है।"
पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने संकट के समाधान के लिए एक कोर कमेटी और एक समन्वय समिति का गठन किया है।
समाज सेवा में स्नातकोत्तर तक शिक्षा प्राप्त करंदलजे ने अभी तक शादी नहीं की है। वह एक स्वयंसेवक हैं। उन्होंने अपना जीवन भाजपा को समर्पित किया है। उनके इस समर्पण को देखते हुए येदियुरप्पा ने पहली बार उन्हें विधान परिषद का सदस्य बनाया। पार्टी में तमाम विरोधों के बावजूद येदियुरप्पा ने उन्हें यशवंतपुर विधानसभा से पार्टी का उम्मीदवार बनाया था। वह जीती भी और फिर उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया गया।
यही नहीं, येदियुरप्पा ने कैबिनेट की बैठक के बाद मीडिया से रूबरू होने की जिम्मेदारी भी उन्हें ही सौंपी थी। लेकिन इस मामले को तूल पकड़ता देख यह जिम्मेदारी गृह मंत्री वी. एस. आचार्य को दे दी गई।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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