झूठी नहीं है कैनेडी के हत्यारे की तस्वीर

डार्टमाउथ कॉलेज में डिजीटल फोरेंसिक्स के अग्रणी हैनी फरीद ने ओसवाल्ड की एक तस्वीर का विश्लेषण किया था। इस तस्वीर में ओसवाल्ड एक हाथ में रायफल और दूसरे में मार्क्‍सवादी समाचार पत्र लिए हुए बैठा है।

फरीद का कहना है, "1963 में उपलब्ध प्रौद्योगिकी की मदद से इस तरह की परिपूर्ण जालसाजी रचना बहुत असंभव है।" छेड़छाड़ का कोई सबूत न मिलने के बाद उन्होंने निष्कर्ष निकाला है कि तस्वीर पूरी तरह से प्रामाणिक है।

ओसवाल्ड व अन्य का दावा था कि वह तस्वीर झूठी थी।

आधुनिक समय के अपराध विज्ञान के उपकरणों का उपयोग कर फोटो का विश्लेषण करने के बाद फरीद ने कहा कि फोटो में निश्चित रूप से कोई परिवर्तन नहीं किया गया था।

'न्यूकॉन इंस्टीट्यूट फॉर कॉम्प्यूटेशनल साइंस' के निदेशक फरीद का कहना है कि यदि उन्हें तस्वीर से छेड़छाड़ के सबूत मिलते तो वह कह सकते थे कि कैनेडी की हत्या एक बड़ी साजिश थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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