बस्तर की जनजातियों में फोटो पहचान पत्र बनवाने की होड़

दंतेवाड़ा (छत्तीसगढ़), 9 नवंबर (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ के उपद्रवग्रस्त बस्तर इलाके के जनजातीय समुदाय के भयभीत लोग फोटो पहचान पत्र बनवाने के लिए इन दिनों स्टूडियो के चक्कर काट रहे हैं। उनका मानना है कि यदि उनके पास फोटो पहचान पत्र नहीं हुआ तो सुरक्षा बल उन्हें नक्सलवादी करार देकर मार डालेंगे।

जहां पुलिस इस प्रकार की आशंका के फैलने से पूरी तरह अस्वीकार कर रही है, वहीं पिछले हफ्ते पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के साथ सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के भी नक्सल विरोधी अभियानों में शामिल होने के कारण जनजातीय लोग कोई खतरा नहीं उठाना चाहते।

दंतेवाड़ा जिले के सुकमा ब्लाक में फोटो स्टूडियो चलाने वाले अर्जुन सिंह ने आईएएनएस को बताया, "अटकलें हैं कि फोटो पहचान पत्र पेश करने में विफल रहने वाले जनजातीय लोगों को सुरक्षा बल नक्सलवादी या उनसे सहानुभूति रखने वाला करार देकर उनका सफाया कर देंगे।"

उन्होंने दावा किया कि पिछले 10-12 दिनों से प्रतिदिन 40 से 50 जनजातीय व्यक्ति उनके पास फोटो खींचवाने आ रहे हैं।

घबराये ग्रामीण कई किलोमीटर पैदल चलकर फोटो पहचान पत्र बनवाने के लिए स्टूडियो पहुंच रहे हैं।

अखिल भारतीय आदिवासी महासभा के अध्यक्ष मनीष कुंजम ने आईएएनएस को बताया, "बस्तर के 12 विधानसभा क्षेत्रों में रहने वाली पूरी आबादी में मीडिया की इन रिपोर्टों के बाद भय और आशंका व्याप्त है कि पुलिसवाले नक्सलियों का सफाया करने के लिए गांवों पर धावा बोलने वाले हैं।"

इसी कारण लोग फोटो पहचान पत्र बनवाने के लिए दौड़भाग कर रहे हैं, जिसे पुलिस के सामने पेश करने से उनकी जान बचने की आशा है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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