अगले वर्ष वापस लिया जा सकता है वित्तीय प्रोत्साहन : प्रधानमंत्री (लीड-2)

विश्व आर्थिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) के भारत आर्थिक शिखर सम्मेलन में सिंह ने रविवार को कहा, "मुझे यह कहते हुए प्रसन्नता हो रही है कि भारत ने अन्य देशों की तुलना में वैश्विक आर्थिक मंदी का ठीक ढंग से मुकाबला किया है। देश की अर्थव्यवस्था 2008-09 में 6.7 प्रतिशत की दर से बढ़ी है। खराब वक्त गुजर चुका है हालांकि वैश्विक अर्थव्यवस्था को ठीक होने में वक्त लगेगा।"

सिंह ने कहा, "अन्य देशों की तरह हमने भी महत्वपूर्ण वित्तीय प्रोत्साहन शुरू किया और हम अगले वर्ष इसे वापस लिए जाने के लिए उचित कार्रवाई करेंगे। हमारा लक्ष्य प्रतिवर्ष नौ प्रतिशत की विकास दर हासिल करने का है।"

सिंह ने कहा कि यह सच है कि अन्य देशों की तुलना में भारत में नए अवसर पैदा हुए हैं लेकिन इससे हमारे सामने कई चुनौतियां भी आई हैं। उन्होंने चालू वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था की विकास दर 6.5 फीसदी और अगले वर्ष सात फीसदी रहने की उम्मीद जताई है।

सिंह ने कहा, "हमारी रणनीति मजबूत घरेलू मांग के बल पर उच्च विकास दर हासिल करने की है। हम बुनियादी संरचना के क्षेत्र में भारी निवेश कर इस लक्ष्य को हासिल करना चाहते हैं।"

पूरी दुनिया के शीर्ष व्यापारिक नेताओं के समक्ष प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था का सबसे खराब दौर पीछे छूट गया है लेकिन वापसी का रास्ता लंबा और अनिश्चित है।

प्रधानमंत्री ने कहा, "चालू वित्त वर्ष में हमने खराब मानसून का सामना किया और परिणामस्वरूप कृषि में गिरावट आई। इसके बावजूद विकास दर 6.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।"

उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था के सुधरने के साफ संकेत हैं। अगले वर्ष सामान्य मानसून के साथ सात प्रतिशत की विकास दर हासिल करने की आशा है।

सिंह ने कहा कि भारत विदेशी निवेश के लिए दरवाजे और खोलेगा और आधारभूत संरचना क्षेत्र सहित कई क्षेत्रों में भागीदारी के लिए पूरी दुनिया के उद्यमियों को आमंत्रित करेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा, "हमारी नीतियां भारत को विदेशी निवेश के लिए और अधिक आकर्षक बनाने की इच्छा से निर्देशित होंगी।"

दावोस स्थित संगठन से भारत के संबंध के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर सिंह ने कहा, "निवेशकों के अनुकूल माहौल तैयार करने के लिए हम प्रक्रियाओं को उपयुक्त और सरल बनाने के लिए विशेष रूप से उत्सुक हैं।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की बदौलत वर्ष 2001-02 के बाद से देश में 121 अरब डॉलर का निवेश आया है।

उन्होंने कहा, "हमारी अर्थव्यवस्था के आकार को देखते हुए यह कोई बहुत बड़ी राशि नहीं है। हाल के वर्षो में भारत को निवेश के सबसे आकर्षक स्थानों में शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त हम भारतीय कंपनियों में विदेशी संस्थागत निवेशकों के निवेश का भी स्वागत करते हैं।"

सिंह ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में जन भागीदारी के बारे में एक बड़ा फैसला हाल ही में लिया गया है।

उन्होंने कहा, "अब हमें घरेलू बाजार में सरकारी हिस्सेदारी की बिक्री में प्रगति होने और चुनिंदा कंपनियों के नए शेयर जारी होने की आशा दिख रही है।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक वित्तीय संकट ने भारतीय बैंकों और वित्तीय संस्थानों को सीधे प्रभावित नहीं किया। लेकिन इससे देश की व्यवस्था को विभिन्न तरीकों से मजबूत बनाने की जरूरत महसूस हुई है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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