तिहाड़ में गूंजते रफी और लता के सुरीले नगमे
नई दिल्ली, 8 नवंबर (आईएएनएस)। देश में कुख्यात अपराधियों के लिए मशहूर तिहाड़ जेल की बैरकों में इन दिनों मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर के सुरीले नगमे गूंज रहे हैं।
जेल प्रशासन ने 'स्पेस रेडियो सेवा' की शुरुआत कैदियों के लिए कुछ महीने पहले ही प्रयोग के तौर पर की थी, लेकिन यह रेडियो सेवा अब तिहाड़ जेल के कैदियों के जीवन का अहम हिस्सा बन चुकी है।
इस रेडियो सेवा की शुरुआत सुबह 5 बजे से होती है जो शाम 5 बजे तक चलती है। कैदी इसका भरपूर आनंद उठा रहे हैं।
तिहाड़ जेल में स्पेस रेडियो सेवा के बारे में जेल प्रवक्ता सुनील गुप्ता ने आईएएनएस को बताया, "इस रेडियो सेवा की शुरुआत न्यायमूर्ति जे.आर. मीणा के हाथों करवाई गई थी। उस वक्त इसे केवल तिहाड़ जेल के मॉडल वार्डो में ही प्रयोग के तौर पर शुरु किया गया था। इस रेडियो सेवा के माध्यम से कैदियों के सुबह की शुरुआत आर्ट ऑफ लिविंग के कार्यक्रमों के साथ होती है।"
तिहाड़ जेल में 'स्पेस रेडियो सेवा' को शुरु करने के पीछे जेल प्रशासन का उद्देश्य यह था कि जेल के अंदर वार्डो में बैठे कैदियों को फुरसत के क्षणों में इस सेवा के तहत पुराने और सदाबहार नगमें सुनाकर उनके तनाव को कम किया जाए। पिछले कुछ महीनों में जेल प्रशासन की यह कोशिश रंग लाती दिख रही है। कैदी इस सेवा के तहत मधुर संगीत का आनंद ले रहे हैं।
सुबह के समय कैदी योग के गुर सीखते हैं तो इसके माध्यम से भजन-कीर्तन का आनंद भी लेते हैं। दोपहर के समय कैदी लता मंगेशकर, मोहम्मद रफी, किशोर कुमार के नगमें सुनते हैं।
स्पेस रेडियो सेवा भी अन्य रेडियो चैनलों की तरह ही है लेकिन इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इस रेडियो सेवा में विज्ञापन नहीं आता है।
इस रेडियो सेवा के प्रसार के बारे में जेल प्रवक्ता ने बताया कि कैदियों की तरफ से मिल रहे अच्छे प्रतिसाद को देखकर जेल प्रशासन काफी खुश है। इस रेडियो सेवा के माध्यम से कैदियों तक अधिकतर पुराने सदाबहार गाने ही पहुंचते हैं। पुराने गानों का ही चयन क्यों किया जाता है इस पर प्रवक्ता का कहना है कि ये गाने दिल को सुकून पहुंचाने वाले होते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
**


Click it and Unblock the Notifications