मैं चीन में अलगावादी आंदोलन को हवा नहीं दे रहा हूं : दलाई लामा (लीड-3)

तवांग (अरूणाचल प्रदेश), 8 नवंबर (आईएएनएस)। पड़ोसी चीन के ऐतराज और तमाम दावों को खारिज करते हुए तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा ने रविवार को तवांग पहुंचे। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उनकी तवांग यात्रा गैर राजनीतिक है तथा वह चीन में अलगावादी आंदोलन को हवा नहीं दे रहे हैं।

वह निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक ही तवांग पहुंचे, जहां हजारों की संख्या में लोगों ने उनका भव्य स्वागत किया।

दलाई लामा ने यहां एक संग्रहालय का उद्घाटन करने के बाद पत्रकारों से कहा, "यह चीन के लिए आम बात है कि मैं जहां भी जाता हूं, वह मेरे खिलाफ प्रचार करता है। चीन की कम्युनिस्ट सरकार का यह दावा पूरी तरह आधारहीन है कि मैं अलगाववादी आंदोलन को बढ़ावा दे रहा हूं।"

उन्होंने कहा, "मेरा तवांग दौरा पूरी तरह गैरराजनीतिक है। इसका उद्देश्य वैश्विक भाईचारे को बढ़ावा देने के अलावा कुछ भी नहीं है।"

उन्होंने कहा, "चीनी सरकार जब तक तिब्बत में तिब्बतियों की बुनियादी समस्याओं को सुलझा नहीं लेती, तब तक मेरे चीन लौटने का सवाल ही पैदा नहीं होता।"

अरूणाचल प्रदेश पर चीन के दावे के बारे में पूछ जाने पर दलाई लामा ने कहा, "सभी को वास्तविक स्थिति की जानकारी है और मैं भी कई मौकों पर अपनी राय स्पष्ट कर चुका हूं।" ज्ञात हो कि उन्होंने कई मौकों पर कहा है कि अरूणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है।

उन्होंने कहा, "मैं जब 1959 में चीन से भाग निकला था तब मैं मानसिक और शारीरिक रूप से काफी कमजोर हो गया था। अब मैं तवांग आकर बहुत खुशी महसूस कर रहा हूं। मेरी बहुत सी यादें यहां से जुड़ी है। तवांग का यह मेरा पांचवां दौरा है।"

उन्होंने कहा, "चीनियों ने 1959 में हमारी बातों का ध्यान नहीं दिया लेकिन जब मैं भारत पहुंचा वह मेरे खिलाफ बोलने लगा। आज चीन ने मेरे और तिब्बतियों के विरूद्ध बहुत ही कड़क रुख अपना रखा है।"

इससे पहले उनके तवांग पहुंचने पर लोगों ने उनका जोरदार स्वागत किया। दलाई लामा के हजारों अनुयायी दुनिया के कोने-कोने से यहां पहुंचे हैं। हजारों स्थानीय लोगों ने पारंपरिक अंदाज में आध्यात्मिक गुरु का स्वागत किया।

तवांग से आठ किलोमीटर की दूरी पर हेलीपैड बना था। यहां से लेकर तवांग तक सड़कों के दोनों ओर लोग अपने आध्यात्मिक नेता का स्वागत करने के लिए कतार बना कर खड़े थे।

दलाई लामा सुबह 7.45 बजे नई दिल्ली से असम के मुख्य शहर गुवाहाटी पहुंचे। इसके बाद वह अरूणाचल पहुंचे।

वरिष्ठ बौद्ध आध्यात्मिक नेता और पूर्व मंत्री टी.जी. रिंपोचे ने आईएएनएस को बताया, "दलाई लामा अरूणाचल पहुंचकर बहुत खुश हैं।" उन्होंने भी दलाई लामा का हवाई अड्डे पर स्वागत किया।

तवांग के मठ में दलाई लामा का धार्मिक विधि से स्वागत करने के लिए लगभग 800 भिक्षु मौजूद थे। एक भिक्षु सरवांग लामा ने कहा, "हम दलाई लामा को यहां पाकर बहुत उत्साहित हैं।"

नोबले पुरस्कार विजेता दलाई लामा की अगवानी के लिए अरूणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री दोरजी खांडू भी मठ में मौजूद थे।

मठ से जुड़े गुरु टुकू ने कहा, "दलाई लामा सोमवार को मठ के निकट एक स्कूल के मैदान में होने वाले प्रार्थना सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह उनकी पहली सार्वजनिक उपस्थिति होगी।"

गौरतलब है कि चीन ने मांग की थी कि भारत दलाई लामा को अरूणाचल दौरे की इजाजत न दे। जबकि भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह दलाई लामा के कहीं भी आने-जाने पर नियंत्रण नहीं लगा सकता।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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