उल्फा नेताओं ने आत्मसमर्पण की बात से किया इंकार
दोनों को बांग्लादेश की सीमा पर त्रिपुरा के गोकुल नगर स्थित सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) चौकी से सेना के एक विशेष हेलीकॉप्टर से गुवाहाटी लाने के बाद यहां के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में पेश किया गया था।
चौधरी को उल्फा के 'विदेश सचिव' और हजारिका को 'वित्त सचिव' के रूप में जाना जाता है।
असम पुलिस प्रमुख शंकर बरुआ ने पत्रकारों से कहा, "चौधरी और हजारिका ने त्रिपुरा में बीएसएफ अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण किया था और उसके बाद हम उन्हें यहां ले आए थे। चूंकि उनके खिलाफ कई पुलिस स्टेशनों में आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं इसलिए दोनों को गिरफ्तार करके अदालत में पेश किया गया था।"
उन्होंने कहा कि हिरासत में उनसे सभी प्रकरणों से संबंधित विस्तृत पूछताछ की जाएगी।
अदालत जाते वक्त हालांकि दोनों उल्फा सदस्यों ने पत्रकारों से कहा कि उन्होंने आत्मसमर्पण नहीं किया है।
चौधरी ने पत्रकारों से कहा, "आत्मसमर्पण का सवाल ही पैदा नहीं होता। हम नहीं जानते कि वास्तव में किसने हमें बांग्लादेश से गिरफ्तार किया और हमें यहां लेकर आया। मौजूदा परिस्थितियों में हम कभी भी सरकार के साथ शांति वार्ता नहीं करेंगे।"
हजारिका ने कहा, "हमें हिरासत में लेना भारत सरकार के एक बड़े षडयंत्र का हिस्सा है और हमारे आत्मसमर्पण की बात एक बहुत बड़ा झूठ है।"
पहले खबर थी कि बांग्लादेश पुलिस की विशेष शाखा ने एक और दो नवम्बर के दरम्यान रात को ढाका से इन दोनों को गिरफ्तार किया था।
इस बीच उल्फा ने सोमवार को 12 घंटे के बंद की घोषणा की है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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