बाबा रामदेव के खिलाफ हुए साधु

Baba Ramdev
लखनऊ। योग गुरू बाबा रामदेव एक बार फिर संकट में पड़ गए हें। उन्‍होंने जमात-ए-हिंद के एक सम्‍मेलन में भाग लिया, जिसके बाद शायद मुस्लिम समुदाय के लोग उनके समर्थन में आ गए होंगे, लेकिन ऐसा करने से अयोध्‍या के साधु समुदाय ने उनके खिलाफ मोर्चा खेल दिया है।

असल में बाबा रामदेव देवबंद में आयोजित एक सम्‍मेलन में पहुंचे और वे वंदे मातरम पर फतवे पर कुछ नहीं बोले। योग गुरू के कुछ नहीं बोलने से अयोध्‍या के धर्माचार्य उनसे खासे नाराज हैं। साधुओं ने स्‍वामी रामदेव पर आरोप लगाया है कि वो अपने व्‍यवसाय को ज्‍यादा तरजीह देते हैं, न कि राष्‍ट्र के हित को।

माफी मांगे बाबा रामदेव

हरिद्वार की अखरा परिषद के महंत ज्ञान दास ने डेक्‍कन हेरल्‍ड को दिए गए साक्षात्‍कार में कहा कि वो इस मुद्दे को इसी महीने परिषद की बैठक में उठाएंगे। उन्‍होंने कहा बाबा रामदेव अब एक व्‍यापारी बनते जा रहे हैं। अगर वो भारतीय हैं तो उन्‍हें वंदे मातरम पर फतवे का विरोध करना चाहिए था।

ऑल इंडिया सेंट कमेटी के सचिव महामंडलेश्‍वर हंस ने भी कहा है कि बाबा रामदेव के मौन से व्‍यवसायिक हित झलक आए हैं। उन्‍होंने ऐसा करके करोड़ों भारतीयों को ठेस पहुंचाई है। उन्‍हें माफी मांगनी चाहिए।

इस मामले पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्‍य मौलाना खालिद राशिद फिरंगीमहली ने कहा कि देवबंद सम्‍मेलन में वंदे मातरम पर कोई फतवा नहीं जारी किया गया है। यह एक प्रस्‍ताव जरूर है, जिस पर सुझाव मांगे गए हैं। जबतक तीन उलेमा दस्‍तखत नहीं कर देते तबतक कोई फतवा नहीं जारी होगा।

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