प्रभाष जोशी का निधन, देश भर में शोक (लीड-1)
जोशी के करीबियों के मुताबिक देर रात सीने में दर्द की शिकायत के बाद जोशी को उनके वसुंधरा (गाजियाबाद) स्थित निवास से रात 11.30 बजे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
उनके परिवार में उनकी पत्नी के अलावा दो बेटे और एक बेटी हैं।
जोशी ने इंदौर में हिंदी दैनिक 'नईदुनिया' से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की। बाद में वह मुंबई और चंडीगढ़ में अंग्रेजी दैनिक 'इंडियन एक्सप्रेस' के संपादक रहे। वर्ष 1983 में उनके नेतृत्व में एक्सप्रेस समूह के हिंदी दैनिक 'जनसत्ता' का प्रकाशन आरंभ हुआ, जिसने अपने आक्रामक तेवरों से हिन्दी पत्रकारिता में अपनी एक नई पहचान बनाई।
पूर्व प्रधानमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शीर्ष नेता अटलबिहारी वाजपेयी ने जोशी के आकस्मिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
वाजपेयी ने अपने शोक संदेश में कहा, "प्रभाष जोशी के निधन का समाचार जानकर मुझे बहुत दु:ख हुआ। जोशी पत्रकारिता की उस पीढ़ी के प्रतिनिधि थे, जो तमाम प्रवाहों के बावजूद आम आदमी, गांव-गंवई और भारतीय मिट्टी के सरोकारों से जुड़े रही। उनकी लेखनी में भारत अभिव्यक्त होता था। पत्रकारिता सिर्फ उनका व्यवसाय नहीं था, अपितु सामाजिक सरोकार था। गांधीवादी आन्दोलन, भूदान आन्दोलन, दस्यू समर्पण और आपातकाल के विरुद्ध लोकतांत्रिक संघर्ष में उनका उल्लेखनीय योगदान रहा।"
उन्होंने कहा, "एक ऐसे जुझारू और लोक पत्रकार तथा अच्छे मित्र के निधन से मुझे गहरा आघात पहुंचा है। मैं दिवंगत आत्मा को अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं और ईश्वर से उनके परिजनों व सहयोगियों को यह दु:ख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना करता हूं।"
पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा ने अपने शोक संदेश में कहा, "जोशी ने हिन्दी पत्रकारिता को पुन: परिभाषित किया। अपनी सीधी सपाट लेखनी से वह अपने आलोचकों तक का दिल जीत लेते थे।"
उन्होंने कहा, "उनके निधन से देश ने अपना एक बेटा और पत्रकारिता जगत के पुरोधा को खो दिया है। उनके निधन से पत्रकारिता जगत में खाली हुए शून्य का भरना बहुत मुश्किल होगा।"
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उनके निधन को हिन्दी पत्रकारिता और प्रदेश के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।
मुख्यमंत्री ने कहा है कि वे उन चुनिंदा हिंदी पत्रकारों में से थे जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाकर मध्य प्रदेश को गौरवान्वित किया है। प्रदेश के जनसंपर्क मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा, स्थानीय शासन मंत्री बाबूलाल गौर और गृह मंत्री उमा शंकर गुप्ता ने भी जोशी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
केंद्रीय सूचना व प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने कहा, "पत्रकार समुदाय ने एक ऐसी शख्सियत को खो दिया है बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे।"
जोशी को उनके निवास पर श्रद्धांजलि देने के बाद पत्रकारों से बातचीत में प्रख्यात साहित्यकार नामवर सिंह ने उनके निधन पर दुख व्यक्त करते हुए कहा, "अब कागद कारे पढ़ने को नहीं मिलेगा, कागद अब कोरे ही रह जाएंगे।"
उन्होंने कहा, "लगता है कि रात के वक्त क्रिकेट मैच देख रहे थे। सचिन के 17 हजार रन पूरा करने की खुशी और फिर तीन रनों से भारत के हार जाने का सदमा वह बर्दाश्त नहीं कर पाए।"
एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने एक बयान जारी कर जोशी के निधन पर शोक व्यक्त किया। बयान में कहा गया, "हिन्दी पत्रकारिता के वह पुरोधा थे। उन्होंने खेल व राजनीतिक पत्रकारिता को एक नया आयाम दिया।"
एनडीटीवी के पंकज पचौरी ने कहा, "प्रभाषजी ऐसे पत्रकार थे जो कभी दबाव में नहीं आए। चाहे वह राजनीति का हो या फिर बाजार का। वह अपने आप में अनूठे पत्रकार थे।"
वरिष्ठ साहित्यकार पंकज बिष्ट ने कहा, "प्रभाषजी हिन्दी के महान संपादकों में से थे। वह निर्भीक पत्रकार थे।"
जोशी की पार्थिव देह को नई दिल्ली से इंदौर ले जाया गया है। शनिवार को इंदौर के निकट बड़वाह में नर्मदा के तट पर उनका अंतिम संस्कार होगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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