डिपो में आग बुझने के बाद जनजीवन पटरी की ओर
विगत 29 अक्टूबर की शाम डिपो में आग लग गई थी। डिपो के 11 टैंको में रखे ईंधन के पूरी तरह जलने के बाद ही आग बुझ सकी। इस हादसे में 11 लोगों की मौत हुई और 150 से अधिक घायल हुए।
जिला प्रशासन ने घटना स्थल से 500 मीटर की दूरी पर गतिविधियों को मंजूरी दे दी है। स्थानीय लोग अपने घरों को लौटने लगे हैं। यहां की औद्योगिक इकाइयों में काम फिर से आरंभ कर दिया गया है।
डिपो के निकट की कॉलोनी के निवासी एस. एन. शर्मा ने बताया, "आग की वजह से हमारे घर क्षतिग्रत हुए हैं। दीवारों में दरार आ गई है और हमें अपने घरों में चोरी का डर भी सता रहा था। इन सबके बावजूद हम घर वापस आकर बहुत खुश हैं।"
जिला प्रशासन ने 80 फीसदी इलाकों में बिजली की आपूर्ति बहाल कर दी है। रेलवे ने भी जयपुर-सवाई माधोपुर क्षेत्र से रेलगाड़ियों के आवागमन को बहाल करने का फैसला किया है।
पुलिस ने उन उद्यमियों के बयान लेने आरंभ कर दिए हैं जिन्होंने इंडियन ऑयल पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया था। कृषि विभाग ने एक समिति का गठन किया है जो आग की वजह फसलों के नुकसान का आकलन करेगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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